बिल गेट्स से लेकर नील मोहन तक, अपने बच्चों को सोशल मीडिया से दूर क्यों रख रहे बड़ी-बड़ी कंपनियों के बॉस? जानें कारण

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<p style="text-align: justify;">बड़ी-बड़ी टेक कंपनियां और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स चलाने वाले लोग खुद अपने बच्चों को इनसे दूर रख रहे हैं. इस कड़ी में ताजा नाम यूट्यूब के सीईओ नील मोहन का है. उन्होंने हाल ही में बताया कि उनका परिवार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का लिमिटेड यूज करता है. अपने बच्चों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि वो यूट्यूब और दूसरे प्लेटफॉर्म पर लिमिटेड समय ही बीता सकते हैं. बता दें कि 2023 में यूट्यूब की कमान संभालने वाले मोहन को इस साल टाइम मैग्जीन ने सीईओ ऑफ द ईयर चुना है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>नील मोहन ने स्क्रीन टाइम को लेकर कही यह बात</strong></p>
<p style="text-align: justify;">टाइम मैग्जीन के साथ इंटरव्यू में मोहन ने कहा, "हम अपने बच्चों के यूट्यूब और दूसरे प्लेटफॉर्म और दूसरे मीडिया पर टाइम को लिमिट करते हैं. वीकेडज हम ज्यादा स्ट्रिक्ट होते हैं और वीकेंड्स पर थोड़ा कम स्ट्रिक्ट होते हैं." मोहन के तीन बच्चे हैं और उन्होंने लगातार पेरेंटल कंट्रोल टूल्स के यूज पर जोर दिया है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये दिग्गज भी जता चुके चिंता</strong></p>
<p style="text-align: justify;">बच्चों पर सोशल मीडिया के बुरे असर को लेकर मोहन की तरह दूसरे टेक दिग्गज भी चिंतित हैं. यूट्यूब की पूर्व CEO Susan Wojcicki भी कह चुकी हैं कि वो अपने छोटे बच्चों को केवल यूट्यूब किड्स देखने देती है, लेकिन इस पर भी टाइम लिमिट लगी हुई है. उन्होंने कहा था कि अति हर चीज की बुरी होती है. एलन मस्क ने भी पिछले साल कहा था कि उन्होंने अपने बच्चों के सोशल मीडिया यूज कर पर पाबंदी नहीं लगाई और यह उनकी गलती है. उन्होंने कहा था कि अधिकतर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों के लिए अच्छे नहीं हैं और उन्हें इनसे दूर रहना चाहिए. माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स भी बच्चों को कम उम्र में फोन दिए जाने के खिलाफ हैं. गेट्स ने बताया कि उन्होंने अपने बच्चों को 14 साल के होने के बाद ही फोन दिया था.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्यों बच्चों के लिए खतरा बन रहा है सोशल मीडिया?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">लगातार रिसर्च में यह बात निकलकर सामने आ रही है कि सोशल मीडिया के ज्यादा इस्तेमाल से बच्चों में एंग्जायटी, डिप्रेशन और नींद न आने जैसी समस्याएं देखी जा रही हैं. इसके अलावा साइबर बुलिंग और ध्यान न लगा पाने जैसी समस्याएं भी हो रही हैं. हाल ही में हुई एक स्टडी में पता लगा है कि जिन बच्चों को 12 साल की उम्र से पहले मोबाइल मिल गया, उनमें नींद की कमी, वजन बढ़ने, एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं देखने को मिली हैं. इन्हीं चिंताओं के बीच ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी लगा दी है.&nbsp;</p>
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