<p style="text-align: justify;"><strong>TRAI:</strong> भारत में बैंकिंग, शेयर बाजार और बीमा जैसे अहम सेक्टरों पर अलग-अलग रेगुलेटरी संस्थाएं नजर रखती हैं. बैंकिंग के लिए RBI, शेयर बाजार के लिए SEBI और बीमा क्षेत्र के लिए IRDAI मौजूद हैं. ये संस्थाएं न सिर्फ नियम बनाती हैं, बल्कि ग्राहकों की शिकायतों पर कार्रवाई भी करती हैं. अगर किसी उपभोक्ता को सेवा से परेशानी होती है तो वह सीधे इन रेगुलेटर्स से संपर्क कर सकता है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">टेलीकॉम सेक्टर में TRAI की जिम्मेदारी</h2>
<p style="text-align: justify;">टेलीकॉम सेवाओं की निगरानी के लिए भारत में Telecom Regulatory Authority of India यानी TRAI काम करती है. इसका मकसद है टेलीकॉम कंपनियों के लिए नियम तय करना, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनाए रखना और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना. कागजों में TRAI की भूमिका काफी मजबूत दिखती है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">मोबाइल यूजर्स की पुरानी परेशानियां</h2>
<p style="text-align: justify;">पिछले कुछ सालों से मोबाइल यूजर्स लगातार TRAI से दखल की मांग कर रहे हैं. सबसे बड़ी शिकायतों में से एक है रिचार्ज खत्म होने से पहले आने वाली लगातार कॉल और मैसेज. प्लान की वैधता खत्म होने से 3–4 दिन पहले ही कंपनियां बार-बार कॉल, SMS और नोटिफिकेशन भेजने लगती हैं. इतना ही नहीं, आउटगोइंग कॉल के दौरान IVR मैसेज भी सुनने पड़ते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">यूजर्स इस व्यवहार को परेशान करने वाला बताते आए हैं और कई बार TRAI से इसे रेगुलेट करने की मांग की गई, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस नियम या सख्त कदम देखने को नहीं मिला.</p>
<h2 style="text-align: justify;">सस्ते रिचार्ज प्लान की मांग</h2>
<p style="text-align: justify;">जुलाई में रिचार्ज प्लान महंगे होने के बाद यूजर्स ने सिर्फ सिम एक्टिव रखने के लिए किफायती प्लान की मांग तेज कर दी. इस मामले में TRAI ने जरूर दखल दिया और टेलीकॉम कंपनियों को बिना डेटा वाले वॉयस-ओनली प्लान लाने को कहा.</p>
<p style="text-align: justify;">इसके बाद कंपनियों ने 400 से लेकर 2000 रुपये तक के वॉयस-ओनली प्लान पेश किए जिनकी वैधता अलग-अलग है. हालांकि, बड़ी संख्या में यूजर्स अब भी इन्हें महंगा मानते हैं. उनकी मांग है कि TRAI कंपनियों को 7 या 15 दिन की कम वैधता वाले सस्ते प्लान लाने के लिए बाध्य करे.</p>
<h2 style="text-align: justify;">4G और 5G कवरेज मैप पर सवाल</h2>
<p style="text-align: justify;">TRAI ने सभी टेलीकॉम ऑपरेटर्स को अपने 4G और 5G नेटवर्क कवरेज मैप सार्वजनिक करने का निर्देश दिया था. ज्यादातर निजी कंपनियों ने इस आदेश का पालन किया, लेकिन सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL का मामला अलग है.</p>
<p style="text-align: justify;">BSNL ने शुरुआत में कवरेज मैप जारी तो किया लेकिन पिछले 6–7 महीनों से वह यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं है. इसके बावजूद TRAI की ओर से न तो कोई सख्त निर्देश आया और न ही किसी तरह की पेनल्टी लगाई गई.</p>
<h2 style="text-align: justify;">क्या मोबाइल यूजर्स की आवाज सुनी जा रही है?</h2>
<p style="text-align: justify;">रिचार्ज से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती कीमतें और जानकारी की कमी जैसे मुद्दे लगातार सामने आ रहे हैं. इसके बावजूद TRAI की कार्रवाई कई मामलों में अधूरी या धीमी नजर आती है. ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि क्या टेलीकॉम रेगुलेटर तेजी से बदलते इस सेक्टर में सच में उपभोक्ताओं के हितों की पूरी तरह रक्षा कर पा रहा है या मोबाइल यूजर्स की आवाज अब भी अनसुनी ही रह जाएगी.</p>
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मोबाइल यूजर्स को चाहिए TRAI का साथ, लेकिन क्या रेगुलेटर सच में सुन रहा है?
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