अब किसी भी कंडीशन में ओवरहीट नहीं होंगे आपके फोन, यह नई टेक्नोलॉजी करेगी कमाल

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<p style="text-align: justify;">फोन का ओवरहीट होना एक बड़ी समस्या है. ज्यादा टेंपरेचर में यूज करने से लेकर चार्जिंग तक के दौरान <a title="फोन ओवरहीट" href=" target="_self">फोन ओवरहीट</a> हो सकता है, जिससे इसे यूज करना काफी मुश्किल हो जाता है. अब इस समस्या से छुटकारा मिलने की उम्मीद जगी है. दरअसल, ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी के इंजीनियरों ने एक थर्मल मैनेजमेंट टेक्नीक तैयार की है, जो थर्मल डायोड की तरह काम करती है और फोन समेत इलेक्ट्रिक व्हीकल और बैटरी यूज करने वाले दूसरे डिवाइसेस को ठंडा रख सकती है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्यों हीट होते हैं डिवाइसेस?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">अभी स्मार्टफोन और दूसरे पोर्टेबल डिवाइसेस में हीट होने की समस्या आती है. इसकी वजह है कि ट्रेडिशनल मैटेरियल में थर्मल एनर्जी किसी भी डायरेक्शन में जा सकती है. इसका मतलब है कि फोन के प्रोसेसर या बैटरी से निकली इंटरनल हीट वापस फोन के कंपोनेंट की तरफ भी जा सकती है, जिससे टेंपरेचर बढ़ जाता है और फोन की परफॉर्मेंस कम हो जाती है. इससे बैटरी पर भी असर पड़ता है और यह जल्दी खराब होने लगती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>नई टेक्नीक कैसे काम करेगी?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">नई टेक्नीक थर्मल रेक्टिफिकेशन के कॉन्सेप्ट पर काम करती है. यह टेक्नीक हीट को कंट्रोल कर इस एक ही डायरेक्शन में पुश कर सकती है. इसमें हीट को फॉरवर्ड पुश किया जा सकता है, जिससे रिवर्स हीट फ्लो रुक जाता है और डिवाइस के अंदर टेंपरेचर को कंट्रोल किया जा सकता है. इसके लिए रिसर्चर ने मैग्नेटिक फील्ड के अंडर सेमीकंडक्टर मैटेरियल को यूज करते हुए नई स्ट्रक्चर तैयार की है. यह सेटअप वन-वे हीट पाथवे क्रिएट कर देता है, जिससे हीट सेंसेटिव एरिया से बाहर निकल जाती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इस टेक्नीक से क्या फायदा होगा?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">इस टेक्नीक के कारण एक नया थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम मिला है, जो फोन, इलेक्ट्रिक व्हीकल, सैटेलाइट और हाई-परफॉर्मेंस <a title="एआई सिस्टम्स" href=" target="_self">एआई सिस्टम्स</a> में ओवरहीटिंग के खतरे को कम कर सकता है. ओवरहीटिंग से बैटरी लाइफ और डिवाइस की रिलायबिलिटी पर बुरा असर पड़ता है. अब इस टेक्नीक के आने के बाद यह खतरा कम होगा और डिवाइसेस को भी ज्यादा टेंपरेचर वाली जगहों पर यूज किया जा सकेगा.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें-</strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong><a title="फोन के साथ कभी न करें ये सेफ्टी मिस्टेक, भारी गड़बड़ हो जाएगी, बैटरी में हो सकता है ब्लास्ट" href=" target="_self">फोन के साथ कभी न करें ये सेफ्टी मिस्टेक, भारी गड़बड़ हो जाएगी, बैटरी में हो सकता है ब्लास्ट</a></strong></p>

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