बच्चों ही नहीं, अब बुजुर्गों को भी लगने लगी है फोन की लत, स्टडी में सामने आई चौंका देने वाली बातें

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<p style="text-align: justify;"><strong>Phone Addiction In Old People:</strong> जब फोन एडिक्शन की बात आती है तो सबसे ज्यादा जिक्र बच्चों और टीनएजर्स का होता है, लेकिन अब यह समस्या बच्चों तक सीमित नहीं है. बुजुर्गों को भी फोन की लत लगने लगी है. हालिया रिपोर्ट्स और रिसर्च से पता चला है कि बुजुर्गों को भी <a title="फोन की लत" href=" target="_self">फोन की लत</a> लगने लगी है और ये घंटों तक मोबाइल फोन से चिपके रहते हैं. कई मामलों में लत इस कदर बढ़ चुकी है कि इससे उनकी सेहत, डेली रूटीन और नींद तक पर असर पड़ने लगा है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पिछले एक दशक में ज्यादा बढ़ी दिक्कत</strong></p>
<p style="text-align: justify;">रिसर्चर का कहना है कि 50 साल से अधिक उम्र के लोग अब स्मार्टफोन, टैबलेट और टीवी के आगे पहले की तुलना में ज्यादा समय बीता रहे हैं. ये लोग देर रात तक सोशल मीडिया स्क्रॉल करते रहते हैं, जिससे नींद पर असर पड़ने लगा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले एक दशक में यह समस्या ज्यादा बढ़ी है और इस दौरान 65 साल से अधिक उम्र के लोग सोशल मीडिया ज्यादा यूज करने लगे हैं. वहीं 50 साल से अधिक उम्र के लोग हर हफ्ते अपने कई घंटे डिजिटल डिवाइसेस पर बीताने लगे हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सोशल मीडिया के अलावा एआई का भी यूज बढ़ा</strong></p>
<p style="text-align: justify;">रिपोर्ट के मुताबिक, अब बच्चों की तरह बुजुर्ग भी फैमिली टाइम के दौरान सोशल मीडिया पर स्क्रॉलिंग के साथ-साथ <a title="एआई चैटबॉट" href=" target="_self">एआई चैटबॉट</a> से चैटिंग में लगे रहते हैं. कुछ समय पहले तक ऐसा केवल टीनएजर्स के बारे में कहा जाता था. एक और रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर स्मार्टफोन, टैबलेट और टीवी समेत सारे डिजिटल डिवाइसेस को मिला लिया जाए तो बुजुर्ग लोगों का स्क्रीन टाइम युवाओं से ज्यादा है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ज्यादा स्क्रीन टाइम के ये नुकसान</strong></p>
<p style="text-align: justify;">चिंता केवल बुजुर्गों के स्क्रीन टाइम को लेकर नहीं है बल्कि उनकी सेहत से भी जुड़ी हुई है. स्टडीज में सामने आया है कि ज्यादा स्क्रीन टाइम के कारण बुजुर्गों की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है. इससे उनकी फिजिकल एक्टिविटीज कम हो जाती है और एंग्जायटी का स्तर बढ़ जाता है.</p>
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