समंदर में एक नॉटिकल माइल तक केबल बिछाने का कितना खर्च, दुनिया में कहां से कहां तक बिछे केबल?

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<p style="text-align: justify;"><strong>Undersea Internet Cable:</strong> आज हम जो तेज इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं उसका बड़ा हिस्सा समंदर के नीचे बिछे<a href=" फाइबर ऑप्टिक केबल्स</a> के जरिए चलता है. ये केबल्स महाद्वीपों को जोड़ते हैं और वैश्विक संचार की रीढ़ माने जाते हैं. दुनिया भर में हजारों किलोमीटर लंबे ये नेटवर्क डेटा को एक देश से दूसरे देश तक कुछ ही सेकंड में पहुंचाते हैं.</p>
<h2 style="text-align: justify;">एक नॉटिकल माइल केबल बिछाने का खर्च कितना?</h2>
<p style="text-align: justify;">समंदर में केबल बिछाना कोई आसान या सस्ता काम नहीं है. जानकारी के अनुसार, आमतौर पर एक नॉटिकल माइल (करीब 1.85 किलोमीटर) केबल बिछाने का खर्च लगभग 30,000 से 50,000 डॉलर (लगभग 25 लाख से 40 लाख रुपये) तक हो सकता है. हालांकि यह लागत कई चीजों पर निर्भर करती है जैसे समुद्र की गहराई, रास्ते में चट्टानें, समुद्री गतिविधियां और तकनीकी जटिलताएं. गहरे समुद्र में केबल बिछाना कुछ हद तक सस्ता होता है जबकि तटीय इलाकों में काम ज्यादा महंगा पड़ता है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">समंदर के नीचे फैला विशाल नेटवर्क</h2>
<p style="text-align: justify;">दुनिया का ज्यादातर इंटरनेट समंदर के नीचे बिछे केबल्स के जरिए चलता है. प्रशांत और अटलांटिक महासागर में करीब 14 लाख किलोमीटर लंबा केबल नेटवर्क मौजूद है. इन केबल्स को बिछाने में बड़ी टेक कंपनियों जैसे Google, Microsoft और Meta (फेसबुक) का बड़ा योगदान है. अटलांटिक महासागर यूरोप और अमेरिका को जोड़ता है जबकि प्रशांत महासागर अमेरिका और एशिया के बीच कनेक्टिविटी देता है. इन दोनों के जरिए दुनिया के लगभग सभी महाद्वीपों तक 95% से ज्यादा इंटरनेट ट्रैफिक पहुंचता है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">भारत तक इंटरनेट कैसे पहुंचता है?</h2>
<p style="text-align: justify;">भारत को मिलने वाला अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट मुख्य रूप से लाल सागर और होर्मुज स्ट्रेट के जरिए आता है. लाल सागर में करीब 17 और होर्मुज स्ट्रेट में लगभग 20 अंडरसी केबल्स बिछी हुई हैं. इनमें AAE-1, फाल्कन, गल्फ ब्रिज इंटरनेशनल और टाटा TGN-गल्फ जैसी प्रमुख लाइनें शामिल हैं जो भारत को ग्लोबल डेटा नेटवर्क से जोड़ती हैं. ये सभी केबल्स भारत में Mumbai, Chennai, Kochi, Thoothukudi और Thiruvananthapuram जैसे शहरों में बने केबल लैंडिंग स्टेशनों से जुड़ी हैं. इन्हीं स्टेशनों के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों तक इंटरनेट पहुंचाया जाता है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">कैसे बिछाए जाते हैं ये केबल?</h2>
<p style="text-align: justify;">इन केबल्स को खास जहाजों की मदद से समुद्र में बिछाया जाता है. पहले समुद्र के तल का सर्वे किया जाता है फिर केबल को सावधानी से नीचे छोड़ा जाता है. उथले पानी में इन्हें समुद्र के भीतर दबाकर सुरक्षित किया जाता है ताकि जहाजों के एंकर या मछली पकड़ने के जाल से नुकसान न हो.</p>
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