आंखों की जांच से ही दिल की बीमारी का पता लगा लेगा AI! बिना टेस्ट के ही होगा डिटेक्ट, जानिए क्या है टेक्नोलॉजी

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<p style="text-align: justify;"><strong>AI Will Detect Heart Disease:</strong> दिल से जुड़ी बीमारियां आज भी दुनिया में मौत की सबसे बड़ी वजह बनी हुई हैं. सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआती समय में कोई खास लक्षण नहीं दिखाती. जब तक इसका पता चलता है तब तक स्थिति गंभीर हो सकती है. यही कारण है कि डॉक्टर हमेशा ऐसे तरीकों की तलाश में रहते हैं जिनसे जोखिम को पहले ही पहचाना जा सके.</p>
<h2 style="text-align: justify;">AI ने खोला नया रास्ता</h2>
<p style="text-align: justify;">अमेरिका की मशहूर संस्था Mayo Clinic के शोधकर्ताओं ने एक नई तकनीक विकसित की है जिसमें <a href=" इंटेलिजेंस (AI)</a> का इस्तेमाल करके दिल की बीमारी के खतरे का अंदाजा लगाया जा सकता है. इस अध्ययन को American College of Cardiology Scientific Session 2026 में पेश किया गया और American Journal of Preventive Cardiology में प्रकाशित किया गया.</p>
<h2 style="text-align: justify;">पुराने टेस्ट से ही मिली नई जानकारी</h2>
<p style="text-align: justify;">इस रिसर्च में लगभग 12,000 लोगों को करीब 16 साल तक ट्रैक किया गया. इसमें एक सामान्य स्कैन कोरोनरी आर्टरी कैल्शियम स्कैन का इस्तेमाल किया गया जो पहले से ही दिल की धमनियों में कैल्शियम जमा होने की जांच के लिए किया जाता है. AI की मदद से इसी स्कैन से एक अतिरिक्त जानकारी निकाली गई जो पहले नजरअंदाज हो जाती थी. यह जानकारी थी दिल के आसपास मौजूद फैट जिसे पेरिकार्डियल फैट कहा जाता है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">दिल के आसपास की चर्बी बनी बड़ा संकेत</h2>
<p style="text-align: justify;">अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों के दिल के आसपास ज्यादा फैट था उनमें भविष्य में हृदय रोग होने का खतरा अधिक था. खास बात यह है कि यह जोखिम उम्र, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज जैसे पुराने कारणों से अलग भी देखा गया. यानी कुछ ऐसे लोग भी जो सामान्य टेस्ट में कम जोखिम वाले दिखते हैं उनमें भी छिपा हुआ खतरा मौजूद हो सकता है जिसे अब AI पहचान सकता है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">डॉक्टरों के लिए आसान होगा फैसला</h2>
<p style="text-align: justify;">इस नई तकनीक से डॉक्टरों को यह तय करने में मदद मिल सकती है कि किस मरीज को तुरंत ध्यान देने की जरूरत है और किसे नहीं. खासतौर पर उन लोगों के लिए यह ज्यादा उपयोगी है जिनमें खतरा थोड़ा ज्यादा है. बेहतर और सटीक जानकारी मिलने से इलाज और बचाव के फैसले ज्यादा प्रभावी हो सकते हैं.</p>
<h2 style="text-align: justify;">बिना अतिरिक्त खर्च के बड़ा फायदा</h2>
<p style="text-align: justify;">इस तकनीक की एक खास बात यह भी है कि इसके लिए अलग से कोई नया टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है. जो स्कैन पहले से किया जा रहा है उसी डेटा को AI के जरिए और बेहतर तरीके से समझा जा सकता है. इससे यह तरीका आसान, किफायती और बड़े स्तर पर लागू करने योग्य बन जाता है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">भविष्य में बदल सकती है इलाज की दिशा</h2>
<p style="text-align: justify;">हालांकि अभी इस तकनीक पर और रिसर्च की जरूरत है लेकिन शुरुआती नतीजे काफी उम्मीद जगाने वाले हैं. आने वाले समय में AI आधारित ऐसे टूल्स दिल की बीमारी को पहले ही पकड़ने में मदद कर सकते हैं जिससे समय रहते इलाज शुरू किया जा सके और कई जानें बचाई जा सकें.</p>
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