<p style="text-align: justify;"><strong>WhatsApp SIM-binding:</strong> मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp ने भारत में <a title="SIM-binding" href=" target="_self">SIM-binding</a> की टेस्टिंग शुरू कर दी है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कई यूजर्स को इन-ऐप नोटिफिकेशन मिलने लगे हैं, जिसमें लिखा होता है कि स्थानीय नियमों के कारण व्हाट्सऐप को डिवाइस में सिम कार्ड की प्रेजेंस को कन्फर्म करना होगा. अभी यह फीचर ट्रायल में है और इसे रोल आउट नहीं किया गया है. बता दें कि भारत सरकार ने पिछले साल नवंबर में आदेश जारी कर कहा था कि सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को सिम-बाइंडिंग नियमों का पालन करना होगा. हाल ही में <a title="सिम बाइंडिंग की डेडलाइन" href=" target="_self">सिम बाइंडिंग की डेडलाइन</a> को बढ़ाकर इस साल के आखिर तक कर दिया गया है. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>SIM-binding क्या है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सिम बाइंडिंग का मतलब है कि मैसेजिंग ऐप्स को केवल उसी डिवाइस पर एक्सेस किया जा सकता है, जिसमें वही सिम है, जिससे उस प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन किया गया था. अगर उस डिवाइस से वह सिम हटा ली जाती है, इनएक्टिव हो जाती है या उसमें दूसरी सिम डाल ली जाती है तो ऐप अपने आप यूजर को लॉग आउट कर देगी. अब WhatsApp इस नए फीचर के जरिए हर कुछ घंटे बाद यह चेक करेगी कि अकाउंट रजिस्टर्ड सिम वाले डिवाइस से ही चलाया जा रहा है या नहीं. इससे अनऑथोराइज्ड एक्सेस पर रोक लगाने में मदद मिलेगी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>WhatsApp यूजर्स पर SIM-binding का क्या असर पड़ेगा?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">फिलहाल व्हाट्सऐप यूजर्स पर इस बदलाव का कोई फर्क नहीं पड़ेगा और वो पहले की तरह ही ऐप को एक्सेस कर पाएंगे. अभी यह फीचर टेस्टिंग के फेज में है और इसे रोल आउट होने में समय लग सकता है. एक बार फीचर रोल आउट होने के बाद यूजर्स केवल उसी डिवाइस पर व्हाट्सऐप को एक्सेस कर पाएंगे, जिसमें रजिस्टर्ड सिम है. इससे उन यूजर्स को दिक्कत हो सकती है, जो सेकेंडरी डिवाइस पर डिपेंड या लगातार सिम कार्ड बदलते रहते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>90 दिन की डेडलाइन को 31 दिसंबर, 2026 तक बढ़ाया गया </strong></p>
<p style="text-align: justify;">पिछले साल जब सरकार ने यह सिम बाइंडिंग को अनिवार्य किया था, तब मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को इसकी पालना के लिए 90 दिनों का समय दिया गया था. इसके जवाब में मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स और ऐप्पल और गूगल जैसी कंपनियों ने इसे लागू करने में टेक्नीकल इश्यू बताते हुए सरकार से समय बढ़ाने की मांग की थी. इसके बाद सरकार की तरफ से डेडलाइन को बढ़ाकर इस साल के आखिर तक कर दिया है. इस बीच कंपनियों को अपने सॉफ्टवेयर और सर्विसेस में जरूरी बदलाव करने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा.</p>
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SIM-binding की तैयारी में जुटी WhatsApp, शुरू कर दी है टेस्टिंग
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