रजनीकांत की Robot 2.0 जैसी रोबोट आर्मी अब करेगी माइनिंग! वैज्ञानिकों की इस नई खोज ने सबको किया हैरान

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<p style="text-align: justify;"><strong>AI Mining Technology:</strong> आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में अब ज्यादातर काम एआई की मदद से किए जा रहे हैं. इसी बीच अब एआई ने Mining उद्योग में भी अपने पैर पसार लिए हैं. खनन का काम अब पहले से ज्यादा जोखिम भरा और मुश्लिक होता जा रहा है. दरअसल, अब खदानें पहले से ज्यादा गहरी होती जा रही हैं जहां पर काम करना और भी ज्यादा मुश्लिक और महंगा हो चुका है. ऐसे में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी टक्नोलॉजी तैयार किया है जो भविष्य में माइनिंग के तरीके को पूरी तरह से बदल सकता है. आइए जानते हैं इस नई टेक्नोलॉजी के बारे में.</p>
<h2 style="text-align: justify;">कैसे तैयार हुई नई टेक्नोलॉजी</h2>
<p style="text-align: justify;">ऑस्ट्रेलिया की एडिलेड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने <a href=" और चींटियों के साथ मिलकर काम करने के तरीकों से प्रेरित होकर इस नई टेक्नोलॉजी को तैयार किया है. दरअसल, वैज्ञानिकों ने छोटे-छोटे रोबोट्स का एक स्वार्म (Swarm) सिस्टम तैयार किया है. बता दें कि ये स्टडी Natural Sciences जर्नल में प्रकाशित हुई है. आपकी जनकारी के लिए बता दें कि जिसस तरह से मधुमक्खियां और चींटियां बिना किसी के मदद के अपने आप ही साथ मिलकर भोजन खोजने का काम करती हैं उस तरीके से अब ये रोबोट्स भी माइनिंग में काम करेंगे.</p>
<h2 style="text-align: justify;">कैसे हुआ सफल परिक्षण</h2>
<p style="text-align: justify;">मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिकों ने लैब में माइनिंग जैसा ही माहौल तैयार किया. इसके बाद छोटे Zumo 2040 रोबोट्स पर तीन तरह की रणनीतियों का टेस्ट किया गया. रोबोट्स को अलग-अलग स्टेज पर अलग-अलग काम करने के लिए तैयार किया गया है जहां पर उन्होंने शानदार प्रदर्शन भी किया है. सबसे पहल स्टेज में रोबोट्स सिर्फ खनिज इकट्ठा करके वापस अपनी जगह पर आ जाते थे. इसके बाद अलग-अलग रोबोट अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाते थे.</p>
<p style="text-align: justify;">कोई संसाधन खोजता था तो दूसरा उसे पहुंचाने का काम करता था. इसके बाद आखिरी यानी तीसरे स्टेज में रोबोट पहले पूरे इलाके का सर्वे करते, संसाधनों की जगह को याद रखते और फिर सबसे आसान रास्तों से खनिज को इकट्ठा करने का काम करते हैं.</p>
<h2 style="text-align: justify;">बिना कंट्रोल सेंटर के मिलकर करते हैं काम</h2>
<p style="text-align: justify;">बता दें कि इस सिस्टम की सबसे बड़ी खास बात ये है कि इसमें वैज्ञानिकों ने कोई भी कंट्रोल सेंटर सिस्टम नहीं दिया है. इसका मतलब है कि हर रोबोट अपने आस-पास के हिसाब से ही खुद फैसला लेगें और दूसरे रोबोट्स के साथ मिलकर ही काम करेंगे. अब अगर कोई भी एक या कुछ रोबोट किसी कारण से काम करना बंद कर देते हैं तो इससे बाकी अन्य रोबोट्स पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा और माइनिंग का काम चलता रहेगा.</p>
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