YouTube पर गाना अपलोड करते ही Google को मिल जाता है ये अधिकार, कंपनी ने खुद किया खुलासा

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<p style="text-align: justify;">गूगल ने इसी साल फरवरी में जेमिनी में Lyria 3 मॉडल को लॉन्च किया था. यह प्रॉम्प्ट के बेस पर गाने बना सकता है. इसकी रिलीज के थोड़े दिन बाद ही गूगल पर एक मुकदमा दर्ज हो गया. इसमें आरोप लगाया गया कि गूगल ने इस मॉडल को ट्रेनिंग देने के लिए <a title="यूट्यूब पर अपलोड हुए गानों" href=" target="_self">यूट्यूब पर अपलोड हुए गानों</a> को यूज किया है और इसके बदले कोई मुआवजा नहीं दिया गया. अब गूगल ने कोर्ट में अपना जवाब दायर कर सबको हैरान कर दिया है. यह कंटेट क्रिएटर के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. आइए जानते हैं कि गूगल ने इस मामले में क्या जवाब दिया है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>गूगल के जवाब ने चौंकाया</strong></p>
<p style="text-align: justify;">कंपनी ने कोर्ट को बताया है कि जब भी कोई आर्टिस्ट <a title="यूट्यूब" href=" target="_self">यूट्यूब</a> पर गाने अपलोड करता है तो वह गूगल को उसे एआई ट्रेनिंग में यूज करने का लाइसेंस दे देता है. गूगल ने कहा कि यूट्यूब की शर्तें उसे प्लेटफॉर्म पर अपलोड हुए म्यूजिक को एआई मॉडल की ट्रेनिंग के लिए यूज करने का लाइसेंस देती हैं. इसका मतलब है कि यूट्यूब पर गाना अपलोड होते ही गूगल को उसे अपने काम के लिए यूज करने की मंजूरी मिल जाती है</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्या गूगल ने गानों से एआई मॉडल को ट्रेनिंग दी है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">यह बात ध्यान रखने वाली है कि गूगल ने यह नहीं कहा कि वह यूट्यूब पर अपलोड होने वाले गानों से अपने <a title="एआई मॉडल" href=" target="_self">एआई मॉडल</a> को ट्रेनिंग देती है. गूगल के वकील का कहना है कि मुकदमे में लगाए गए आरोप गलत हैं. अगर आरोपों को एक बार सच मान भी लिया जाए तो यह मुकदमा नहीं बनता क्योंकि अपलोड करने वाले ने अपलोडेड कंटेट को यूज करने का लाइसेंस दिया हुआ है. अब अगर गूगल की यह दलील मान ली जाती है तो कंपनी को यूट्यूब पर अपलोडेड गानों से अपने एआई सिस्टम को ट्रेनिंग का पूरा राइट मिल जाएगा.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>दूसरी कंपनियों से अलग है गूगल की अप्रोच</strong></p>
<p style="text-align: justify;">गूगल की इस मामले में अप्रोच कॉपीराइट उल्लंघन के आरोपों का सामना कर रहीं दूसरी कंपनियों से अलग है. Suno, Udio और Anthropic के मामलों में इन कंपनियों ने कहा था कि कॉपीराइट मैटेरियल से एआई को ट्रेनिंग देना गलत नहीं है क्योंकि इसके कारण ऐसे सिस्टम बन रहे हैं, जो बड़े स्तर पर बदलाव लाने वाले हैं. उनका दावा है कि वो कॉपीराइट वाले कंटेट का फेयर यूज कर रही हैं और इसलिए यह उल्लंघन का मामला नहीं बनता.</p>
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