आपका शरीर Fat Burn कर रहा है या नहीं? वैज्ञानिकों ने बनाया कमाल का डिवाइस, अब मिनटों में चलेगा पता

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<p style="text-align: justify;"><strong>Fat Burn Device:</strong> आजकल लोग अपने स्वास्थय को लेकर काफी एक्टिव रहते हैं. लोग अब अपने शरीर में होने वाले हर बदलाव पर नजर रखते हैं. लेकिन सबसे ज्यादा मामले फैट को लेकर आता है जिसमें लोग पता नहीं लगा पाते हैं कि उनके शरीर में कितना फैट बर्न हुआ है. इसी को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने एक ऐसा डिवाइस खोज निकाला है जिसकी मदद से अब लोग आसानी से पता लगा पाएंगे कि उनका शरीर डेली कितना फैट बर्न कर रहा है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">ऐसे चलेगा पता</h2>
<p style="text-align: justify;">मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आजकल स्मार्टवॉच और स्मार्ट स्केल शरीर में फैट परसेंटेज का अनुमान लगाने के लिए बायोइलेक्ट्रिकल इम्पीडेंस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि ये केवल एक अंदाजा होता है और ये नहीं बताता कि उस समय शरीर वास्तव में फैट को एनर्जी के रूप में इस्तेमाल कर रहा है या नहीं.</p>
<p style="text-align: justify;">इसी समस्या का समाधान खोजने के लिए वैज्ञानिकों ने एक नया हैंडहेल्ड ब्रीथ एनालाइजर तैयार किया है जो सांस में मौजूद एसीटोन (Acetone) की मात्रा को मापकर बता सकता है कि शरीर फैट बर्निंग के प्रोसेस में है या नहीं.</p>
<h2 style="text-align: justify;">कैसे काम करता है ये डिवाइस</h2>
<p style="text-align: justify;">रिपोर्ट के मुताबिक, एंड्रियास गुंटनर <a href=" G&uuml;ntner)</a> के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने इस डिवाइस को तैयार किया है. बता दें कि जब शरीर एनर्जी के लिए फैट का इस्तेमाल करता है तो इस प्रोसेस को कीटोसिस (Ketosis) कहा जाता है. इस दौरान शरीर में कीटोन बनते हैं और सांस में एसीटोन का लेवल बढ़ जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;">ये डिवाइस उसी एसीटोन को पहचानकर फैट बर्निंग की स्थिति का आकलन करता है. यानी अब ब्लड टेस्ट के बिना भी ये जानकारी मिल सकती है कि शरीर किस तरह एनर्जी का इस्तेमाल कर रहा है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">इससे पड़ेगा असर</h2>
<p style="text-align: justify;">आपको बता दें कि सांस के जरिए एसीटोन मापने में सबसे बड़ी चुनौती <a title="मौसम" href=" data-type="interlinkingkeywords">मौसम</a> की नमी और सांस लेने के तरीके का प्रभाव होता है. वैज्ञानिकों ने इस समस्या का समाधान भी निकाल लिया है. डिवाइस में ऐसा सिस्टम लगाया गया है जो एक्सट्रा नमी और दूसरी प्रदूषित चीजों को फिल्टर कर देता है. इसके साथ एक मोबाइल ऐप भी दिया गया है जो यूजर्स को सही तरीके से सांस लेने का निर्देश देता है. अगर कोई व्यक्ति बहुत तेज या बहुत हल्की सांस छोड़ता है तो ऐप उसे तुरंत तरीका बदलने का सुझाव दे देगा.</p>
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