भारत के इस पड़ोसी देश के पास आ गया वो तकनीकी हथियार जो है बेहद खतरनाक, पाकिस्तान का अच्छा 'दोस्त' है ये मुल्क़

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<p style="text-align: justify;"><strong>China&rsquo;s Most Dangerous Weapon:</strong> चीन के पास कितने परमाणु हथियार हैं, यह पूरी तरह से एक राज्य-गोपनीय विषय है. अलग-अलग संस्थाएं इस पर भिन्न-भिन्न आंकलन पेश करती हैं. वर्ष 2025 में बुलेटिन ऑफ एटॉमिक साइंटिस्ट्स और फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स ने अनुमान लगाया कि चीन के पास लगभग 600 परमाणु हथियारों का भंडार है. वहीं अमेरिकी रक्षा विभाग ने यह संख्या 600 से अधिक सक्रिय परमाणु हथियारों के रूप में बताई है जिससे चीन दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा परमाणु शक्ति संपन्न देश बन गया है.</p>
<h2 style="text-align: justify;"><strong>नो-फर्स्ट-यूज़ नीति और नई रणनीतियां</strong></h2>
<p style="text-align: justify;">चीन ने 1964 में ‘नो-फर्स्ट-यूज़’ (NFU) यानी पहले हमला न करने की नीति अपनाई थी, और यह नीति 2025 तक बरकरार है. हालांकि, 2020 के दशक की शुरुआत में कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार चीन की रणनीति में "लॉन्च ऑन वॉर्निंग" (LOW) यानि चेतावनी मिलने पर तुरंत जवाबी हमला करने की नीति की ओर बदलाव देखा गया है.</p>
<h2 style="text-align: justify;"><strong>स्थलीय अंतरमहाद्वीपीय मिसाइलें</strong></h2>
<p style="text-align: justify;">चीन का परमाणु डिफेंस सिस्टम भौगोलिक रूप से बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है ताकि किसी भी पहले हमले से परमाणु हथियारों को बचाया जा सके. मिसाइल इकाइयां रणनीतिक रूप से फैली हुई हैं और इन्हें संचालित करने वाले मुख्यालय अलग स्थानों पर स्थित हैं. चीन की परमाणु कमान छह बड़े मिसाइल बेस से संचालित होती है जो लियाओनिंग, आनहुई, यूनान, हुनान, हेनान और गांसू प्रांतों में हैं. इनमें से तीन मुख्य बेस देश के भीतरी हिस्से हुनान, हेनान और गांसू में स्थित हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">चीन ने अपने कई मिसाइल सिस्टम को विशाल सुरंगों के नेटवर्क में छिपाकर रखा है. 2009 की रिपोर्ट के अनुसार, ये सुरंगें 5,000 किलोमीटर से अधिक लंबी हो सकती हैं. इसे चीन की सेना "भूमिगत महान दीवार" भी कहती है.</p>
<h2 style="text-align: justify;"><strong>मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें</strong></h2>
<p style="text-align: justify;">चीन की लगभग 55% मिसाइलें मध्यम दूरी की हैं जो क्षेत्रीय लक्ष्यों पर केंद्रित हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>DF-3A:</strong> यह 1971 में सेवा में आई एकल-चरण, तरल ईंधन से चलने वाली मध्यम दूरी की मिसाइल है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>DF-21:</strong> दो चरणों वाली, ठोस ईंधन से चलने वाली यह मिसाइल 1991 में तैनात की गई थी. यह चीन की पहली सड़क से चलने वाली मध्यम दूरी की मिसाइल थी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>DF-26:</strong> यह परमाणु और पारंपरिक दोनों प्रकार के हथियार ले जाने में सक्षम है. इसकी खासियत यह है कि युद्ध के दौरान भी इसका हथियार प्रकार बदला जा सकता है. इसे 2016 में पेश किया गया था, परंतु संभवतः 2018 में पूर्ण रूप से सक्रिय हुआ.</p>
<h2 style="text-align: justify;"><strong>टैक्टिकल क्रूज़ मिसाइलें</strong></h2>
<p style="text-align: justify;"><strong>CJ-10:</strong> यह एक आधुनिक चीनी क्रूज़ मिसाइल है, जो ज़मीन से ज़मीन पर वार कर सकती है. इसका विकास ख-55 मिसाइल पर आधारित है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>YJ-62:</strong> यह एक धीमी गति वाली मिसाइल है जो ज़मीन और समुद्र दोनों से दुश्मन को निशाना बना सकती है.</p>
<h2 style="text-align: justify;"><strong>लंबी दूरी की मिसाइलें</strong></h2>
<p style="text-align: justify;">चीन लंबी दूरी की मिसाइलों को वे मानता है जिनकी रेंज 3000 से 8000 किलोमीटर के बीच होती है. अधिकांश परमाणु हथियार एक मुख्य भंडारण केंद्र किनलिंग पर्वत श्रृंखला में रखे जाते हैं, जबकि कुछ क्षेत्रीय डिपो में भी मौजूद रहते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>DF-4 (CSS-3):</strong> यह दो-चरणीय तरल ईंधन पर आधारित लंबी दूरी की मिसाइल है जिसे 1980 के आसपास सीमित मात्रा में भूमिगत ठिकानों में तैनात किया गया था. इसकी मारक क्षमता लगभग 5,500 किमी है और यह 3,300 किलोटन की परमाणु क्षमता रखती है. हालांकि इसका मार्गदर्शन प्रणाली अपेक्षाकृत कम सटीक है.</p>
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