Battery Lifespan Tips : इस बैटरी में लगा दिया थोड़ा-सा सोना तो चलेगी सालोंसाल, साइंटिस्ट करने वाले हैं तगड़ा धमाल

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<p style="text-align: justify;"><strong>Battery Lifespan Tips : </strong>दुनिया तेजी से सोलर और विंड जैसी रिन्यूएबल एनर्जी की तरफ बढ़ रही है, लेकिन इन एनर्जी स्रोतों की एक बड़ी समस्या है कि ये हर समय बिजली नहीं बनाते है. कभी सूरज नहीं होता, कभी हवा नहीं चलती, ऐसे में बिजली को स्टोर करना बहुत जरूरी हो जाता है ताकि जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जा सके. &nbsp;आज के समय में लिथियम-आयन बैटरियां सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती हैं, लेकिन ये महंगी हैं और कभी-कभी सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भी पैदा करती हैं. इसी वजह से वैज्ञानिक ऐसे ऑप्शन ढूंढ रहे हैं जो सस्ते, सुरक्षित और लंबे समय तक चलने वाले हों. ऐसे में कनाडा की कॉनकॉर्डिया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इस समस्या का एक बहुत ही आसान लेकिन असरदार समाधान निकाला है. उन्होंने बैटरी के अंदर की सतह पर बहुत ही थोड़ी मात्रा में सोने के नैनोपार्टिकल्स मिलाए, जिससे बैटरी ज्यादा चले. तो आइए जानते हैं कि किस बैटरी में थोड़ा-सा सोना लगा दिया तो सालों साल चलेगी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>किस बैटरी में थोड़ा-सा सोना लगा दिया तो सालों साल चलेगी</strong></p>
<p style="text-align: justify;">जिंक आधारित बैटरियां एक अच्छा ऑप्शन मानी जाती हैं क्योंकि इनमें इस्तेमाल होने वाले पदार्थ सस्ते और आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन इनमें एक बड़ी कमी होती है कि ये ज्यादा समय तक टिक नहीं पाती है. &nbsp;समय के साथ इन बैटरियों के अंदर छोटे-छोटे नुकीले धातु के ढांचे बनने लगते हैं, जिन्हें डेंड्राइट्स कहा जाता है. ये डेंड्राइट्स धीरे-धीरे बढ़ते रहते हैं और आखिर में बैटरी के अंदर शॉर्ट सर्किट कर देते हैं. इसी वजह से बैटरी खराब हो जाती है. इस समस्या को दूर करने के लिए कनाडा की कॉनकॉर्डिया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक आसान और असरदार तरीका निकाला है. &nbsp;उन्होंने बैटरी की अंदरूनी सतह पर बहुत ही कम मात्रा में सोने के नैनो कण मिलाए, लेकिन पूरी सतह को सोने से नहीं ढका, बल्कि सिर्फ 10 प्रतिशत से भी कम हिस्से पर ही बहुत छोटे-छोटे सोने के कण हल्के से फैला दिए, जिससे बैटरी की परफॉर्मेंस बेहतर हो गई.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह तरीका कैसे काम करता है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">ये सोने के कण बैटरी के अंदर जिंक के जमने के तरीके को बदल देते हैं. इससे डेंड्राइट्स का बनना काफी धीमा हो जाता है. &nbsp;रिसर्च में पाया गया कि जिन बैटरियों में सोने के नैनोपार्टिकल्स डाले गए थे, उनमें डेंड्राइट्स 50 गुना तक धीरे बढ़े यानी बैटरी का खराब होना बहुत देर से शुरू हुआ.&nbsp;</p>
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<p style="text-align: justify;"><strong>X-ray से हुआ बड़ा खुलासा</strong></p>
<p style="text-align: justify;">वैज्ञानिकों ने इस पूरे बदलाव को समझने के लिए कनाडियन लाइट सोर्स की शक्तिशाली एक्स-रे तकनीक का इस्तेमाल किया. इन तेज एक्स-रे की मदद से बहुत छोटे स्तर पर हो रहे बदलावों को साफ-साफ देख पाए. इससे पता चला कि इतने कम सोने के कण भी बैटरी के अंदर बड़ा असर डाल सकते हैं. लैब टेस्ट में इन नई बैटरियों ने 6000 घंटे से भी ज्यादा समय तक काम किया, जो सामान्य जिंक बैटरियों की तुलना में काफी बेहतर है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कितना महंगा है यह तरीका?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सोना इस्तेमाल करना महंगा लग सकता है, लेकिन यहां बहुत ही कम मात्रा में सोना लिया गया है. इसलिए इसकी लागत पारंपरिक गोल्ड कोटिंग की तुलना में लगभग 100 गुना कम है. वैज्ञानिक अब इस तकनीक को अन्य बैटरी डिजाइनों और नई तकनीकों जैसे सेंसर, सोलर पैनल और लाइटिंग सिस्टम में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं.&nbsp;</p>
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