AI ऐप्स डाउनलोड करने में भारत सबसे आगे, कोई नहीं है टक्कर देने वाला, अमेरिका भी पीछे

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<p style="text-align: justify;">आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) को अपनाने में भारत का कोई मुकाबला नहीं है. जनरेटिव एआई ऐप्स डाउनलोड करने और चैटबॉट्स यूज करने में भारत दुनिया में सबसे आगे है और उसने कई एआई कंपनियों की सबसे बड़ी मार्केट अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया है. सेंसर टावर के डेटा के मुताबिक, जनरेटिव एआई ऐप्स के लिए भारत दुनिया की सबसे बड़ी मार्केट बन गया है और यहां सालाना आधार पर एआई ऐप्स डाउनलोड में 207 प्रतिशत का इजाफा हुआ है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>हर 5 में से एक डाउनलोड भारत में</strong></p>
<p style="text-align: justify;">रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में डाउनलोड होने वाली कुल ऐप्स में से 20 प्रतिशत अकेले भारत में होती है. हालांकि, एआई ऐप्स के यूज के मामले में अमेरिका आगे बना हुआ है. भारत के मुकाबले अमेरिकी यूजर एआई ऐप्स पर हर हफ्ते 21 प्रतिशत अधिक समय बीताते हैं और भारतीय से ज्यादा सेशन में लॉग-इन हुए हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>फ्री ऑफर का दिख रहा असर</strong></p>
<p style="text-align: justify;">भारत में एआई ऐप्स के डाउनलोड बढ़ने का एक बड़ा कारण <a title="एआई कंपनियों के प्रमोशनल ऑफर" href=" target="_self">एआई कंपनियों के प्रमोशनल ऑफर</a> और ग्रोक और डीपसीक जैसे नए प्लेटफॉर्म्स का आना है. भारत में गूगल ने जियो के साथ पार्टनरशिप की है और कंपनी हजारों की कीमत वाला अपना प्लान फ्री में ऑफर कर रही है. इसी तरह परप्लेक्सिटी की एयरटेल के साथ पार्टनरशिप थी. ओपनएआई ने भी पिछले साल के अंत में अपने <a title="ChatGPT Go प्लान को एक साल के लिए बिल्कुल मुफ्त" href=" target="_self">ChatGPT Go प्लान को एक साल के लिए बिल्कुल मुफ्त</a> कर दिया था. इसके अलावा एआई जनरेटेड के वायरल ट्रेंड ने भी इन ऐप्स के डाउनलोड को बढ़ाया है. पिछले साल गिबली आर्ट, 3D फिगरीन, साड़ी ट्रेंड समेत कई वायरल ट्रेंड लोगों के बीच खूब पॉपुलर हुए थे.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ऐप्स पर पैसे खर्च नहीं कर रहे भारतीय लोग</strong></p>
<p style="text-align: justify;">भारतीय यूजर्स भले ही ऐप्स डाउनलोड करने में सबसे आगे हैं, लेकिन इन-ऐप परचेज करने में काफी पीछे हैं. यानी भारत में लोग ऐप डाउनलोड करने के बाद उसके प्रीमियम या दूसरे फीचर्स के लिए पैसा खर्च नहीं कर रहे हैं. 2025 में केवल इन-ऐप परचेज में केवल 1 पर्सेंट इंडियन यूजर्स थे.</p>
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