<p style="text-align: justify;"><strong>Meta AI Glasses:</strong> आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्मार्ट डिवाइस लोगों की जिंदगी आसान बना रहे हैं लेकिन इनसे जुड़ी गोपनीयता को लेकर नए सवाल भी खड़े हो रहे हैं. हाल ही में सामने आई एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि <a href=" के AI</a> स्मार्ट ग्लासेस से रिकॉर्ड हुए बेहद निजी और संवेदनशील वीडियो कंपनी के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों तक पहुंच गए. इस खुलासे ने डेटा प्राइवेसी को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">जांच में सामने आई चौंकाने वाली जानकारी</h2>
<p style="text-align: justify;">स्वीडन के दो प्रमुख मीडिया संस्थानों Svenska Dagbladet और Goteborgs-Posten की जांच में बताया गया कि Meta के लिए काम करने वाले कुछ कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी ऐसे वीडियो देख रहे थे जिन्हें डेटा एनोटेशन के लिए इस्तेमाल किया जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;">बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार इन वीडियो में कई बेहद निजी दृश्य शामिल थे. इनमें लोगों की बैंकिंग से जुड़ी जानकारी, बिना कपड़ों के दिखाई देने वाले लोग, निजी संबंधों से जुड़े दृश्य, अश्लील सामग्री और यहां तक कि बाथरूम इस्तेमाल करते हुए रिकॉर्ड हुए पल भी शामिल थे.</p>
<p style="text-align: justify;">बताया गया कि इनमें से कई वीडियो जानबूझकर नहीं बल्कि गलती से रिकॉर्ड हो गए थे. उदाहरण के तौर पर कुछ यूजर अपने स्मार्ट ग्लासेस उतारकर कहीं रख देते थे लेकिन उन्हें यह पता नहीं चलता था कि कैमरा अब भी चालू है और आसपास का दृश्य रिकॉर्ड हो रहा है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">विदेशी कर्मचारियों ने जताई परेशानी</h2>
<p style="text-align: justify;">जांच में यह भी सामने आया कि इन वीडियो को देखने और टैग करने का काम अक्सर दूसरे देशों में बैठे कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों से करवाया जाता है. रिपोर्ट में कहा गया कि केन्या जैसे देशों में काम करने वाले कुछ कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें अपने काम के दौरान बहुत ही संवेदनशील और आपत्तिजनक सामग्री देखनी पड़ती थी जिससे वे मानसिक रूप से परेशान हो जाते थे.</p>
<h2 style="text-align: justify;">एजेंसियों की नजर</h2>
<p style="text-align: justify;">इस खुलासे के बाद डेटा सुरक्षा से जुड़े नियामकों की भी चिंता बढ़ गई है. ब्रिटेन की सूचना आयुक्त संस्था (ICO) ने Meta से इस मामले में अधिक जानकारी मांगी है. उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कंपनी डेटा सुरक्षा से जुड़े कानूनों का पालन कर रही है या नहीं.</p>
<h2 style="text-align: justify;">सोशल मीडिया पर भी उठे सवाल</h2>
<p style="text-align: justify;">यह मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी काफी नाराजगी देखने को मिली. कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि आखिर इतनी निजी जानकारी और वीडियो को कैसे संभाला जा रहा है. लोग यह भी जानना चाहते हैं कि Meta अपने AI सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए कितनी मात्रा में मानव कर्मचारियों की मदद ले रही है और उनके पास यूजर्स की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी कितनी संवेदनशील जानकारी पहुंच रही है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">Meta ने क्या कहा</h2>
<p style="text-align: justify;">Meta की ओर से कहा गया है कि कंपनी किसी भी डेटा को कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के साथ साझा करने से पहले उसे फिल्टर करती है ताकि लोगों की निजी जानकारी सुरक्षित रहे. हालांकि, स्वीडिश मीडिया की जांच रिपोर्ट इस दावे पर सवाल उठाती है और कहती है कि कर्मचारियों तक पहुंचने वाले वीडियो में कई बेहद निजी दृश्य मौजूद थे.</p>
<h2 style="text-align: justify;">Meta की प्राइवेसी पॉलिसी क्या कहती है?</h2>
<p style="text-align: justify;">Meta का दावा है कि उसके AI स्मार्ट ग्लासेस को बनाते समय यूजर्स की प्राइवेसी को खास महत्व दिया गया है. कंपनी के अनुसार इन डिवाइस में इस तरह की सुविधाएँ दी गई हैं जिनसे यूज़र अपने डेटा पर काफी हद तक कंट्रोल रख सकते हैं. हालांकि कंपनी की प्राइवेसी पॉलिसी यह भी स्पष्ट करती है कि कुछ परिस्थितियों में AI के साथ हुई बातचीत या इंटरैक्शन की समीक्षा की जा सकती है.</p>
<p style="text-align: justify;">इस प्रोसेस में कभी-कभी ऑटोमेटेड सिस्टम की मदद ली जाती है जबकि कुछ मामलों में इंसान भी इन इंटरैक्शन को देख या जांच सकते हैं. कंपनी का कहना है कि ऐसा आमतौर पर AI सिस्टम को बेहतर बनाने और सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से किया जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;">Meta अपनी पॉलिसी में यूजर्स को यह सलाह भी देती है कि वे ऐसी निजी या संवेदनशील जानकारी साझा करने से बचें जिसे वे किसी सिस्टम में स्टोर या प्रोसेस होते हुए नहीं देखना चाहते. यानी यदि कोई व्यक्ति किसी जानकारी को पूरी तरह निजी रखना चाहता है तो उसे AI के साथ बातचीत के दौरान साझा न करना ही सुरक्षित माना जाता है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">Meta AI Glasses कैसे काम करते हैं?</h2>
<p style="text-align: justify;">Meta के AI स्मार्ट ग्लासेस में वॉयस कमांड के जरिए कई काम किए जा सकते हैं. यूजर सिर्फ Hey Meta बोलकर AI चैटबॉट को सक्रिय कर सकता है और उससे बातचीत शुरू कर सकता है. इस कमांड के जरिए कैमरा भी चालू किया जा सकता है जिससे यूजर सीधे अपने नजरिए से फोटो या वीडियो रिकॉर्ड कर सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;">इसके अलावा इन ग्लासेस की मदद से फर्स्ट-पर्सन वीडियो कॉल करना भी संभव है यानी सामने मौजूद व्यक्ति वही देख सकता है जो ग्लासेस पहनने वाला देख रहा होता है. इस वजह से यह डिवाइस कंटेंट रिकॉर्डिंग और लाइव इंटरैक्शन के लिए काफी अलग अनुभव देता है.</p>
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