LinkedIn पर सेफ नहीं है आपका डेटा! ऐसे हो रही आपकी जासूसी, जानिए क्या है पूरा मामला

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<p style="text-align: justify;"><strong>LinkedIn Privacy:</strong> प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म LinkedIn को लंबे समय से एक भरोसेमंद जगह माना जाता रहा है लेकिन हाल ही में सामने आई एक रिसर्च ने इस छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, प्लेटफॉर्म यूजर्स की ब्राउजर एक्टिविटी को ट्रैक करने के लिए एक खास स्क्रिप्ट का इस्तेमाल कर रहा है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">BrowserGate रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ</h2>
<p style="text-align: justify;">जर्मन संगठन Fairlinked eV की BrowserGate रिपोर्ट और BleepingComputer द्वारा की गई पुष्टि के अनुसार, <a href=" हर पेज लोड के दौरान एक JavaScript स्क्रिप्ट इंजेक्ट कर रहा है. यह स्क्रिप्ट यूजर के ब्राउजर में इंस्टॉल हजारों Chrome एक्सटेंशन्स को स्कैन करती है. इसकी संख्या अब 6,000 से भी ज्यादा बताई जा रही है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">कौन-कौन सी जानकारी हो रही है इकट्ठा</h2>
<p style="text-align: justify;">इस स्क्रिप्ट के जरिए सिर्फ एक्सटेंशन ही नहीं बल्कि यूजर के डिवाइस से जुड़ी कई अहम जानकारियां भी ली जा रही हैं. इसमें CPU कोर की संख्या, टाइम जोन, भाषा सेटिंग, बैटरी स्टेटस और मौजूदा मेमोरी जैसी डिटेल्स शामिल हैं. इसके अलावा स्क्रीन साइज, स्टोरेज क्षमता और सिस्टम से जुड़ी अन्य तकनीकी जानकारी भी इकट्ठा की जाती है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">एक्सटेंशन्स को पहचानने का तरीका</h2>
<p style="text-align: justify;">रिपोर्ट के अनुसार, यह स्क्रिप्ट खास एक्सटेंशन IDs से जुड़े फाइल्स को एक्सेस करने की कोशिश करती है. इस तरीके से यह पता लगाया जाता है कि यूजर के ब्राउजर में कौन-कौन से एक्सटेंशन इंस्टॉल हैं. यह तकनीक Chromium आधारित ब्राउजर्स में पहले से जानी-पहचानी मानी जाती है. रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि यह डेटा HUMAN Security नाम की साइबर सिक्योरिटी कंपनी तक भेजा जा रहा है. हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">LinkedIn ने क्या दी सफाई</h2>
<p style="text-align: justify;">इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए LinkedIn ने कहा है कि वह यूजर्स की प्राइवेसी और प्लेटफॉर्म की सुरक्षा बनाए रखने के लिए ऐसे एक्सटेंशन्स की पहचान करता है जो बिना अनुमति के डेटा स्क्रैप करते हैं. कंपनी का कहना है कि वह इस जानकारी का इस्तेमाल किसी भी संवेदनशील जानकारी को निकालने के लिए नहीं करती है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">क्या यूजर्स को चिंता करनी चाहिए?</h2>
<p style="text-align: justify;">इस पूरे मामले ने ऑनलाइन प्राइवेसी को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है. अगर ये दावे सही साबित होते हैं तो यह यूजर्स की डिजिटल सुरक्षा और भरोसे के लिए बड़ा मुद्दा बन सकता है. ऐसे में सतर्क रहना और अपने ब्राउजर की सेटिंग्स व एक्सटेंशन्स पर नजर रखना बेहद जरूरी हो जाता है.</p>
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