<p style="text-align: justify;"><strong>Sim Binding Timeline:</strong> भारत सरकार ने WhatsApp और Telegram समेत दूसरी मैसेजिंग ऐप्स यूज करने वाले लोगों को बड़ी राहत दी है. दरअसल, दूरसंचार विभाग (DoT) ने WhatsApp और Telegram आदि मैसेजिंग ऐप्स के लिए <a title="सिम बाइंडिंग की डेडलाइन " href=" target="_self">सिम बाइंडिंग की डेडलाइन </a>को बढ़ा दिया है. अब इन कंपनियों के पास सिम बाइंडिंग के नियम के पालन के लिए इस साल के अंत तक का समय है. बता दें कि सरकार ने पिछले साल नवंबर में सिम बाइंडिंग को लेकर नियम जारी किए थे. आइए जानते हैं कि सिम बाइंडिंग को क्यों लाया गया और अब सरकार ने इसकी टाइमलाइन को क्यों बढ़ाया है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Sim Binding क्या है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;"><a title="सिम बाइंडिंग" href=" target="_self">सिम बाइंडिंग</a> का मतलब है कि मैसेजिंग ऐप्स को केवल उसी डिवाइस पर एक्सेस किया जा सकता है, जिसमें वही सिम है, जिससे उस प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन किया गया था. अगर उस डिवाइस से वह सिम हटा ली जाती है, इनएक्टिव हो जाती है या उसमें दूसरी सिम डाल ली जाती है तो ऐप अपने आप यूजर को लॉग आउट कर देगी. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Sim Binding की टाइमलाइन क्यों बढ़ाई गई है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">मनीकंट्रोल ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि दूरसंचार विभाग ने टाइमलाइन को बढ़ाते हुए सभी स्टेकहोल्डर्स को इसकी जानकारी देनी शुरू कर दी है. इन प्लेटफॉर्म्स ने सिम बाइंडिंग को लागू करने में टेक्नीकल इश्यू बताते हुए अतिरिक्त टाइम की मांग की थी. 30 मार्च से सरकार ने हर प्लेटफॉर्म को इसकी जानकारी देना शुरू कर दिया है. मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के अलावा गूगल और ऐप्पल जैसी मोबाइल कंपनियों ने भी अतिरिक्त समय मांगा था. ऐप्पल का कहना था कि वह अपने iOS इकोसिस्टम की टेक्नीकल सीमा को देखते हुए इसे लागू नहीं कर पाएगी. अब कंपनी इसके समाधान पर काम कर रही है. मेटा भी इसे लेकर सरकार से बातचीत कर रही है. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Sim Binding को अनिवार्य क्यों किया गया था?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सरकार की दलील है कि सिम बाइंडिंग से साइबर फ्रॉड के मामले रोकने में मदद मिलेगी. दरअसल, सरकार ने यह पाया था कि यूजर्स की पहचान के लिए मोबाइल नंबर यूज करने वाली ऐप्स डिवाइस में बिना सिम के भी अपनी सर्विस यूज करने दे रही है. इससे टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी को खतरा पैदा होता है और इस वजह से देश से बाहर बैठे लोग साइबर फ्रॉड कर सकते हैं. शुरुआत में सिम बाइंडिंग को लागू करने के लिए मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को 90 दिनों का समय दिया गया था, लेकिन अब इसकी टाइमलाइन को 2026 के अंत तक बढ़ाया गया है.</p>
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WhatsApp और Telegram यूजर्स के लिए खुशखबरी! सरकार ने दे दी यह बड़ी राहत
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