अब बिना फोन के भी हो सकती है आपकी ट्रैकिंग! WiFi राउटर से होगी आपकी पहचान, जानिए क्या है टेक्नोलॉजी

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<p style="text-align: justify;"><strong>Wi-Fi Router:</strong> अब तक माना जाता था कि डिजिटल ट्रैकिंग से बचने के लिए स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच या दूसरे कनेक्टेड गैजेट्स को बंद करना काफी है. लेकिन जर्मनी के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जो भविष्य में सिर्फ WiFi सिग्नल की मदद से लोगों की पहचान कर सकती है. यानी अगर आपके पास कोई डिवाइस न भी हो तब भी आपकी मौजूदगी और पहचान छिपाना मुश्किल हो सकता है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">साधारण WiFi राउटर से पहचानने का दावा</h2>
<p style="text-align: justify;">जर्मनी के Karlsruhe Institute of Technology के वैज्ञानिकों ने एक नया तरीका पेश किया है जिसमें सामान्य WiFi राउटर का इस्तेमाल करके लोगों को पहचाना जा सकता है. यह तकनीक इस बात का विश्लेषण करती है कि इंसानी शरीर आसपास मौजूद रेडियो वेव्स को किस तरह प्रभावित करता है.</p>
<p style="text-align: justify;">शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह <a href=" इतना सटीक है कि किसी व्यक्ति के पास फोन या कोई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस न होने पर भी उसकी पहचान की जा सकती है. यही वजह है कि इस तकनीक को लेकर निजता और निगरानी से जुड़ी चिंताएं तेजी से बढ़ रही हैं.</p>
<h2 style="text-align: justify;">कैसे काम करती है यह तकनीक?</h2>
<p style="text-align: justify;">इस तकनीक को BFId नाम दिया गया है. यह WiFi 5 में मौजूद एक फीचर Beamforming Feedback Information (BFI) का फायदा उठाती है. आमतौर पर BFI का इस्तेमाल WiFi नेटवर्क की स्पीड और कनेक्शन बेहतर बनाने के लिए किया जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;">समस्या यह है कि ये सिग्नल लगातार बिना एन्क्रिप्शन के ट्रांसमिट होते रहते हैं. यानी आसपास मौजूद कोई भी WiFi डिवाइस इन्हें चुपचाप कैप्चर कर सकता है और यूजर को इसकी भनक तक नहीं लगती.</p>
<p style="text-align: justify;">इसके बाद मशीन लर्निंग मॉडल इन रेडियो सिग्नलों का विश्लेषण करके इंसानों की एक तरह की रेडियो इमेज तैयार करते हैं. यह बिल्कुल कैमरे की तरह काम करता है, फर्क सिर्फ इतना है कि यहां रोशनी की जगह रेडियो वेव्स का इस्तेमाल होता है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">99.5 प्रतिशत तक सही पहचान</h2>
<p style="text-align: justify;">रिसर्च के दौरान करीब 197 लोगों पर इस सिस्टम का परीक्षण किया गया. वैज्ञानिकों का दावा है कि यह तकनीक 99.5 प्रतिशत तक सटीकता के साथ लोगों की पहचान करने में सफल रही. खास बात यह रही कि व्यक्ति किस दिशा में चल रहा है या उसका चलने का तरीका कैसा है, इससे पहचान पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ा.</p>
<p style="text-align: justify;">यानी भविष्य में किसी सार्वजनिक जगह, कैफे, एयरपोर्ट या ऑफिस में आने-जाने वाले लोगों को बार-बार पहचानना और ट्रैक करना संभव हो सकता है, बिना उन्हें इसकी जानकारी हुए.</p>
<h2 style="text-align: justify;">फोन बंद करने पर भी नहीं मिलेगा बचाव</h2>
<p style="text-align: justify;">शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि सिर्फ फोन बंद कर देना पर्याप्त सुरक्षा नहीं हो सकता. जब तक आसपास मौजूद WiFi डिवाइस नेटवर्क से जुड़े रहेंगे तब तक रेडियो वेव्स सक्रिय रहेंगी और आसपास के माहौल की मैपिंग करती रहेंगी.</p>
<p style="text-align: justify;">वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे हर WiFi राउटर संभावित निगरानी उपकरण में बदल सकता है. अगर इस डेटा को पहले से मौजूद स्मार्टफोन रिकॉर्ड या दूसरे डिजिटल डेटा के साथ जोड़ दिया जाए तो किसी व्यक्ति की असली पहचान निकालना और आसान हो जाएगा.</p>
<h2 style="text-align: justify;">भविष्य में बढ़ सकती है निगरानी</h2>
<p style="text-align: justify;">विशेषज्ञों को डर है कि यह तकनीक बड़े स्तर पर निगरानी के लिए इस्तेमाल की जा सकती है. कैमरे दिखाई देते हैं और उन पर नियम भी लागू होते हैं लेकिन WiFi राउटर आमतौर पर बैकग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर माने जाते हैं जिन पर लोग ध्यान नहीं देते.</p>
<p style="text-align: justify;">रिसर्च टीम का मानना है कि अगर समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो आने वाले समय में WiFi आधारित ट्रैकिंग सिस्टम सार्वजनिक और निजी दोनों जगहों पर एक अदृश्य निगरानी नेटवर्क तैयार कर सकते हैं.</p>
<h2 style="text-align: justify;">एक्टिविस्ट और प्रदर्शनकारियों के लिए भी खतरा</h2>
<p style="text-align: justify;">शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि कई एक्टिविस्ट, पत्रकार और प्रदर्शनकारी डिजिटल ट्रैकिंग से बचने के लिए जानबूझकर स्मार्टफोन साथ नहीं रखते. लेकिन रेडियो वेव्स पर आधारित यह नई पहचान तकनीक उनकी इस सावधानी को भी बेअसर कर सकती है. इसी वजह से वैज्ञानिक अब भविष्य के WiFi स्टैंडर्ड्स में प्राइवेसी सुरक्षा जोड़ने की मांग कर रहे हैं ताकि तेज इंटरनेट के साथ लोगों की प्राइवेसी भी सुरक्षित रह सके.</p>
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