एज वेरिफिकेशन लागू करने में इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स के छूटे पसीने, दाढ़ी-मूंछ बनाकर सिस्टम को धोखा दे रहे बच्चे

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<p style="text-align: justify;"><strong>Online Age Verification:</strong> इंटरनेट को लेकर अलग-अलग देशों में नियम कड़े होते जा रहे हैं. इसे देखते हुए कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की एक्सेस मुश्किल हो गई है. कई प्लेटफॉर्म्स ने बच्चों को दूर रखने के लिए <a title="एज वेरिफिकेशन" href=" target="_self">एज वेरिफिकेशन</a> समेत कई चेक लगा दिए हैं, लेकिन बच्चों ने इससे बचने के लिए बड़े-बड़े तरीके निकाल लिए हैं. हाल ही में आई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि एज वेरिफिकेशन के लिए बच्चे अपने चेहरों पर मूंछ-दाढ़ी बना रहे हैं, जिससे सिस्टम को उनकी उम्र ज्यादा लगे और वो इस काम में कामयाब भी हो रहे हैं. एक पैरेंट ने बताया कि उनके 12 साल के बच्चे ने आईब्रो पेंसिल की मदद से चेहरे पर मूंछे बना ली. इस कारण एज वेरिफिकेशन सिस्टम ने उसे 12 की जगह 15 साल का समझ लिया.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सिस्टम को बाइपास करना आसान</strong></p>
<p style="text-align: justify;">बच्चों की एक्सेस रोकने के लिए कई प्लेटफॉर्म्स ने अलग-अलग तरीके से उम्र वेरिफाई करने के सिस्टम लागू किए हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 53 प्रतिशत बच्चों ने कहा है कि हालिया दिनों में उन्हें अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर एज वेरिफाई करने को कहा गया. करीब 46 प्रतिशत बच्चों का कहना है कि एज वेरिफिकेशन को बाइपास करना बहुत आसान है. करीब एक तिहाई बच्चों ने कहा कि वो ऐसा कर चुके हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>बच्चे अपना रहे ये तरीके</strong></p>
<p style="text-align: justify;">कई बच्चे मूंछ-दाढ़ी बनाकर तो कई नकली बर्थडेट या किसी और यूजर की आईडी से लेकर एज वेरिफिकेशन से बच रहे हैं. कई और यूजर VPN, बड़े लोगों की फोटो-वीडियो अपलोड कर या अपने पैरेंट्स के डिवाइस से एक्सेस कर एज वेरिफिकेशन के झंझट से बच रहे हैं.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स लागू कर रहे हैं एज वेरिफिकेशन&nbsp;</strong></p>
<p style="text-align: justify;">ऐसे प्लेटफॉर्म्स, जहां चैटिंग, मैच्योर कंटेट या टीन सेफ्टी शामिल होती है, वो एज वेरिफिकेशन जैसे कई टूल एड कर रहे हैं. मेटा इस मामले में एआई का यूज कर रही है, वहीं कई दूसरे प्लेटफॉर्म अलग तरीके अपना रहे हैं. नियमों के चलते इन प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों को दूर रखने की जिम्मेदारी डाल दी गई है, लेकिन बच्चे इनसे बचने के तरीकों के साथ तैयार रहते हैं. अगर ये प्लेटफॉर्म फेस स्कैन, आईडी अपलोड या एआई के जरिए उम्र का अंदाजा लगाने जैसे तरीके अपनाएं तो इनके अपने खतरे हैं. प्राइवेसी से जुड़ी चिंताओं के अलावा इन तरीकों से गलत यूजर्स को भी फ्लैग किया जा सकता है, जो नई समस्या खड़ी हो सकती है.&nbsp;</p>
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