फोटो असली है या AI से बनी? अब ChatGPT और Gemini बताएंगे तस्वीर का पूरा सच

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<p style="text-align: justify;"><strong>AI Photo:</strong> सोशल मीडिया के दौर में किसी भी वायरल फोटो पर आंख बंद करके भरोसा करना अब आसान नहीं रह गया है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से ऐसी तस्वीरें तैयार की जा रही हैं जो पहली नजर में बिल्कुल असली लगती हैं. पहले AI से बनी तस्वीरों को पहचानना आसान होता था क्योंकि उनमें चेहरे टेढ़े-मेढ़े दिखते थे या बैकग्राउंड में कई गलतियां नजर आ जाती थीं. लेकिन अब नई तकनीक ने AI इमेज को इतना एडवांस बना दिया है कि असली और नकली फोटो में फर्क करना मुश्किल हो गया है. यही कारण है कि लोग कई बार बिना जांच किए फर्जी तस्वीरों को सच मानकर शेयर कर देते हैं.</p>
<h2 style="text-align: justify;">AI से बनी तस्वीरों में कहां पकड़ में आती है गलती?</h2>
<p style="text-align: justify;">भले ही AI इमेज पहले से ज्यादा रियलिस्टिक हो चुकी हों लेकिन उनमें अब भी कुछ ऐसी कमियां रह जाती हैं जो ध्यान से देखने पर पकड़ में आ सकती हैं. कई बार हाथों की उंगलियां असामान्य दिखती हैं, दांतों की बनावट अजीब लगती है या चश्मा और कान की बालियां सही तरीके से नजर नहीं आतीं. तस्वीर में मौजूद टेक्स्ट भी कई बार उल्टा-पुल्टा या समझ से बाहर होता है.</p>
<p style="text-align: justify;">इसके अलावा भीड़ में मौजूद लोगों के चेहरे एक जैसे दिखाई देना, रोशनी और छाया का सही तालमेल न होना या बैकग्राउंड में अननेचुरल चीजें दिखना भी AI फोटो की पहचान हो सकती है. इसलिए किसी भी वायरल तस्वीर को जूम करके ध्यान से देखना काफी जरूरी माना जा रहा है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">ChatGPT और Gemini कैसे करते हैं फोटो की पहचान?</h2>
<p style="text-align: justify;">अब बड़ी टेक कंपनियां भी AI इमेज की पहचान के लिए नए टूल्स तैयार कर रही हैं. OpenAI ने ऐसा सिस्टम विकसित किया है जो यह पता लगाने में मदद करता है कि कोई तस्वीर AI से बनाई गई है या उसमें एडिटिंग की गई है. यूजर अपने फोन या कंप्यूटर के ब्राउजर में OpenAI का इमेज वेरिफिकेशन टूल खोलकर फोटो अपलोड कर सकते हैं. इसके बाद सिस्टम तस्वीर को स्कैन करता है और उसमें मौजूद AI से जुड़े डिजिटल संकेतों और पैटर्न को जांचता है. जांच पूरी होने पर यह जानकारी मिल जाती है कि तस्वीर असली है या AI टूल्स की मदद से तैयार की गई है.</p>
<p style="text-align: justify;">दूसरी तरफ Google का Gemini भी <a href=" तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है. यह तकनीक AI से तैयार की गई तस्वीरों में खास तरह के डिजिटल मार्कर पहचानने में सक्षम मानी जाती है. यूजर Gemini ऐप में फोटो अपलोड करके सीधे पूछ सकते हैं कि तस्वीर AI जनरेटेड है या नहीं.</p>
<h2 style="text-align: justify;">रिवर्स इमेज सर्च भी है बड़ा हथियार</h2>
<p style="text-align: justify;">AI फोटो की सच्चाई पता करने के लिए रिवर्स इमेज सर्च भी बेहद उपयोगी तरीका माना जाता है. इसमें किसी तस्वीर को सर्च इंजन पर अपलोड करके यह देखा जा सकता है कि वह इंटरनेट पर पहली बार कहां दिखाई दी थी. अगर एक ही फोटो अलग-अलग कहानियों और दावों के साथ वायरल हो रही हो तो उसके फेक होने की संभावना बढ़ जाती है.</p>
<p style="text-align: justify;">साथ ही अगर कोई तस्वीर किसी भरोसेमंद न्यूज वेबसाइट या आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर मौजूद नहीं है तो उस पर शक करना जरूरी हो जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में AI कंटेंट और ज्यादा स्मार्ट होगा इसलिए इंटरनेट पर दिखने वाली हर वायरल फोटो को बिना जांचे सच मानना खतरनाक साबित हो सकता है.</p>
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