<p style="text-align: justify;"><strong>China Satellite System:</strong> चीन कुछ अन्य देशों के साथ मिलकर ऐसा <a title="सैटेलाइट सिस्टम" href=" target="_self">सैटेलाइट सिस्टम</a> बनाना चाहता है तो बाढ़, <a title="भूकंप" href=" data-type="interlinkingkeywords">भूकंप</a> जैसी आपदा के आने से पहले ही उसे अलर्ट कर देगा. इसके लिए उनसे कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और ताजिकिस्तान समेत सेंट्रल एशिया के कुछ देशों के साथ हाथ मिलाया है. ये देश मिलकर एक सैटेलाइट सिस्टम बना रहे हैं, जो इस इलाके में आने वाले आपदा को लेकर अलर्ट कर देगा. इसे Tianwu Constellation नाम दिया गया है और इसके तहत 1,024 सैटेलाइट स्पेस में भेजे जा सकते हैं. ये सैटेलाइट स्पेस में रिमोट सेंसिंग डेटा कलेक्ट कर उसे शेयर करेंगे.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>AI की भी ली जाएगी मदद</strong></p>
<p style="text-align: justify;">इस प्रोजेक्ट को लीड कर रहे वैज्ञानिकों ने बताया कि सैटेलाइट से मिले डेटा को प्रोसेस कर एआई मॉडल को फीड किया जाएगा. इसके लिए शिनजियांग में एक डेटा सेंटर बनाया गया है. स्पेस से आए डेटा की मदद से एआई मॉडल की ट्रेनिंग भी होगी और आपदा आने से पहले ही उसका पता लगा पाएगा. इस सिस्टम के जरिए माउंटेन रेंज और ग्लेशियर की रियल-टाइम मॉनिटरिंग भी होगी. बताया जा रहा है कि जिन ग्लेशियर पर नजर रखी जाएगी, वो पिछले कुछ दशकों में 20-40 प्रतिशत की दर से पिघल रहे हैं. इससे समुद्र का स्तर बढ़ेगा और इसका सीधा असर अर्थव्यवस्था के साथ पर्यावरण और समाज पर भी पड़ेगा. बता दें कि चीन पहले से ही BeiDo नाम के सैटेलाइट की मदद से नैचुरल डिजास्टर पर नजर रख रहा है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्या जासूसी का भी है खतरा?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">उद्देश्य को देखते हुए चीन का यह प्रोजेक्ट कमाल का लग रहा है, लेकिन इसमें कुछ खतरे भी छिपे हुए हैं. चीन ने अभी तक इस सिस्टम में कलेक्ट होने वाले डेटा, इमेजरी और मीडिया को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है. मसलन, यह क्या-क्या डेटा कलेक्ट करेगा और एआई मॉडल कैसे इस डेटा को प्रोसेस करेगा. साथ ही यह भी नहीं बताया गया है कि इस सैटेलाइट का फोकस कहां रहेगा. ऐसे में इस सैटेलाइट सिस्टम का जासूसी के लिए इस्तेमाल होने की शंका भी जताई जा रही है. इससे पहले चीन ने 2023 में Yaogan-41 जियोस्टेशनरी सैटेलाइट लॉन्च किया था, जो प्रशांत और हिंद महासागर पर नजर रखने में कैपेबल है. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>चीन की नीयत पर इसलिए भी संदेह</strong></p>
<p style="text-align: justify;">यह दावे के साथ नहीं कहा जा सकता कि चीन का नया सिस्टम जासूसी के लिए डिप्लॉय किया जाएगा, लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि इससे खतरा बना हुआ है. अमेरिका भी चीनी सैटेलाइट से जासूसी की चिंता जाहिर कर चुका है.</p>
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<p style="text-align: justify;"><strong><a title="यह काम कर दिया तो मिलेंगे 47 लाख रुपये, OpenAI ने दे दिया खुला चैलेंज" href=" target="_self">यह काम कर दिया तो मिलेंगे 47 लाख रुपये, OpenAI ने दे दिया खुला चैलेंज</a></strong></p>
आपदा आने से पहले ही मिल जाएगा अलर्ट! चीन बना रहा हाईटेक सैटेलाइट सिस्टम
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