<p style="text-align: justify;"><strong>Students Data at Risk:</strong> डिजिटल दुनिया में आज प्राइवेसी लोगों की सबसे बड़ी चिंता का विषय बन चुकी है. माना जाता है कि आज डेटा ही सबसे बड़ी ताकत है. जिसके पास जितना डेटा वह उतना ताकतवर. इतना ही नहीं, आज के समय में साइबर फ्रॉड भी काफी तेजी से बढ़ रहा है. डेटा की मदद से साइबर हमलावर लोगों की निजी जानकारी चुरा लेते हैं और कई बार लोगों को ठगी का शिकार बनना पड़ता है.</p>
<p style="text-align: justify;">अब स्कूलों में भी बच्चों के डेटा सुरक्षित नहीं है. दरअसल, स्कूलों में ऑनलाइन क्लास, डिजिटल अटेंडेंस, लर्निंग ऐप्स और एडटेक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. इसी वजह से बच्चों का निजी जानकारी खतरे में पड़ चुकी है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि बच्चों की डिजिटल प्राइवेसी की सुरक्षा आज एक बड़ा विषय बन चुका है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">डिजिटल प्लेटफॉर्म बनी वजह</h2>
<p style="text-align: justify;">आज ज्यादातर स्कूलों में पढ़ाई से लेकर अन्य कामों के लिए डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल किया जा रहा है. ऑनलाइन एग्जाम से लेकर अटेंडेंस ऐप्स तक छात्रों का एक बड़ा डिजिटल रिकॉर्ड इकट्ठा हो जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;">इन सभी प्लेटफॉर्म्स के कारण बच्चों का डिजिटल फुटप्रिंट लगातार बढ़ता जा रहा है. ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि ये जानकारी सुरक्षित रहे और गलत हाथों तक न पहुंचे.</p>
<h2 style="text-align: justify;">एडमिशन से पहले ही डेटा कलेक्शन</h2>
<p style="text-align: justify;">मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आज स्कूल में एडमिशन से पहले ही संस्थान बच्चों का डेटा इकट्ठा करना शुरू कर देते हैं. इसमें उनका नाम, जन्मतिथि, घर का पता, पहचान पत्र, पैरेंट्स के कॉनटेक्ट नंबर्स शामिल है. वहीं, एडमिशन के बाद बच्चों के <a href=" रिकॉर्ड</a>, एग्जाम रिजल्ट्स, फोटो, वीडियो और उनके हेल्थ रिकॉर्ड भी इक्ट्ठा कर लेते हैं. इसी से एक बच्चे का पूरा एक बड़ा डिजिटल रिकॉर्ड इकट्ठा हो जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;">सोशल मीडिया पर फोटो शेयर करना कितना सुरक्षित</p>
<p style="text-align: justify;">ज्यादातर स्कूल आज अपना प्रमोशल करने के लिए बच्चों की उपलब्धियों को सोशल मीडिया और वेबसाइट पर उनकी फोटो या वीडियो शेयर कर देती हैं. लेकिन क्या ऐसा करना बच्चों के लिए सुरक्षित है. इसके लिए बच्चों के पैरेंट्स से परमिशन लेना भी जरूरी होता है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">साइबर अपराध का बढ़ता खतरा</h2>
<p style="text-align: justify;">विशेषज्ञों के अनुसार, एक बार किसी बच्चे की फोटो या निजी जानकारी इंटरनेट पर पब्लिक हो जाए तो उसे पूरी तरह हटाना बेहद मुश्किल हो जाता है. इस जानकारी का इस्तेमाल फर्जी पहचान बनाने, फोटो मॉर्फिंग, Cyber Harassment और अन्य साइबर अपराधों में किया जा सकता है. यही वजह है कि बच्चों की डिजिटल सेफ्टी को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">DPDP Act 2023 ने तय किए नए नियम</h2>
<p style="text-align: justify;">भारत का डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट 2023 इसीलिए बना हुआ है. ये एक्ट स्कूलों, एडटेक कंपनियों और बच्चों का डेटा संभालने वाले सभी संस्थानों पर लागू होता है. जानकारी के मुताबिक, इस कानून के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का डेटा प्रोसेस करने से पहले उन्हें वेरिफाई और बच्चों के पैरेंट्स से परमिशन लेना जरूरी होता है. इसके अलावा बच्चों का डेटा सिर्फ एक तय मकसद के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकता है. साथ ही बच्चों को प्रमोशन के लिए इस्तेमाल करना और उनकी डिजिटल ट्रैकिंग पर भी रोक लगी हुई है.</p>
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बच्चों का डेटा खतरे में! स्कूलों की इस बड़ी लापरवाही से बढ़ रहा प्राइवेसी का संकट, रिपोर्ट में हुआ हैरान करने वाला खुलासा
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