Piyush Goyal Deepfake Video: CJP प्रोटेस्ट पर अब केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का AI Deepfake Video वायरल, ऐसे करें पहचान

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<p style="text-align: justify;"><strong>Piyush Goyal on Deepfake Video : </strong>सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को कथित तौर पर विवादित बयान देते हुए दिखाया जा रहा है. हालांकि केंद्रीय मंत्री ने इस वीडियो को पूरी तरह फर्जी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया डीपफेक बताया है. उन्होंने कहा कि उनके असली बयान के साथ छेड़छाड़ कर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की गई है. इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है और एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है. वहीं प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने भी इस वीडियो को फर्जी करार दिया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि पूरा मामला क्या है और डीपफेक वीडियो की पहचान कैसे की जा सकती है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पीयूष गोयल ने वीडियो को बताया AI से बना डीपफेक</strong></p>
<p style="text-align: justify;">केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि संसद के बाहर मीडिया से हुई उनकी बातचीत वाले वीडियो को जानबूझकर एडिट किया गया और AI की मदद से डीपफेक वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर फैलाया गया. उनका कहना है कि इसका मकसद लोगों के बीच गलत जानकारी फैलाना और उन्हें गुमराह करना है. उन्होंने कहा कि इस तरह की भ्रामक सामग्री लोकतांत्रिक संवाद को भी नुकसान पहुंचाती है.</p>
<p style="text-align: justify;">पीयूष गोयल ने बताया कि उन्होंने इस मामले में पुलिस शिकायत दर्ज करा दी है. उनके अनुसार, 25 जुलाई 2026 को सुबह 4:35 बजे नई दिल्ली के चाणक्यपुरी पुलिस स्टेशन में एफआईआर नंबर 123/26 दर्ज की गई. उन्होंने साफ कहा कि इस फर्जी वीडियो को बनाने, सोशल मीडिया पर फैलाने या जानबूझकर उसे बढ़ावा देने वाले सभी लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>PIB ने भी वीडियो को बताया फर्जी</strong></p>
<p style="text-align: justify;">प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक यूनिट ने भी वायरल वीडियो को पूरी तरह फर्जी बताया है. PIB के अनुसार, प्रधानमंत्री <a title="नरेंद्र मोदी" href=" data-type="interlinkingkeywords">नरेंद्र मोदी</a> और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के AI से तैयार किए गए वीडियो सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाने के उद्देश्य से शेयर किए जा रहे हैं. यूनिट का कहना है कि इन वीडियो में ऑडियो और विजुअल दोनों के साथ छेड़छाड़ की गई है. PIB ने यह भी कहा कि इन वीडियो को पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा नेटवर्क से जुड़े हैंडल्स द्वारा सोशल मीडिया पर बढ़ावा दिया जा रहा है. इन वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी के पेपर लीक पर दिए गए बयान और संसद के बाहर पीयूष गोयल की मीडिया से बातचीत को डिजिटल तरीके से बदलकर अलग संदर्भ में पेश किया गया.&nbsp;</p>
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<p style="text-align: justify;"><strong>Deepfake क्या होता है और यह क्यों खतरनाक है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">डीपफेक AI की ऐसी तकनीक है, जिसकी मदद से किसी व्यक्ति के चेहरे, आवाज और हाव-भाव की नकल करके नकली वीडियो या ऑडियो तैयार किया जाता है. ऐसे वीडियो देखने में बिल्कुल असली लग सकते हैं, इसलिए कई लोग बिना जांच किए उन पर भरोसा कर लेते हैं. इसका इस्तेमाल गलत जानकारी फैलाने, राजनीतिक प्रचार, साइबर फ्रॉड और लोगों को गुमराह करने के लिए भी किया जा सकता है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>डीपफेक वीडियो की पहचान कैसे करें?</strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>1. चेहरे और हाव-भाव पर ध्यान दें -</strong> डीपफेक वीडियो में कई बार आंखों की झपक, होंठों की हरकत और चेहरे की लाइटिंग असामान्य दिखाई देती है. चेहरे के किनारों पर धुंधलापन या एक्सप्रेशन भी असली जैसे नहीं लगते हैं.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>2. आवाज और लिप-सिंक जांचें -</strong> अगर वीडियो में होंठों की हरकत और आवाज एक-दूसरे से मेल नहीं खा रही हो या आवाज जरूरत से ज्यादा रोबोटिक या अजीब लगे, तो यह डीपफेक होने का संकेत हो सकता है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>3. वीडियो का स्रोस जरूर जांचें -</strong> किसी भी वायरल वीडियो पर भरोसा करने या उसे शेयर करने से पहले देखें कि वह किसी आधिकारिक अकाउंट से आया है या नहीं, जरूरत पड़ने पर गूगल या रिवर्स इमेज सर्च से भी पुष्टि करें.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>4. AI डिटेक्शन टूल्स की मदद लें -</strong> ऑनलाइन उपलब्ध AI डिटेक्शन टूल्स वीडियो और तस्वीरों में एडिटिंग, मेटाडेटा और पिक्सल पैटर्न की जांच करके फर्जी कंटेंट की पहचान करने में मदद कर सकते हैं. हालांकि, इनका रिजल्ट हमेशा 100 प्रतिशत सटीक नहीं होता है.&nbsp;</p>
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