<p style="text-align: justify;"><strong>How Police Track Social Media Post:</strong> <a title="नोएडा में हुई हिंसा" href=" target="_self">नोएडा में हुई हिंसा</a> की जांच में जुटी पुलिस को कुछ हैरान कर देने वाली जानकारी मिली है. पुलिस ने दावा किया है कि <a title="सोशल मीडिया" href=" target="_self">सोशल मीडिया</a> के जरिए पाकिस्तान से हिंसा भड़काने की कोशिश हुई है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पाकिस्तान से चलने वाले अकाउंट्स से ऐसी पोस्ट्स डाली गईं, जिससे लोग भड़क गए और कानून व्यवस्था खराब हुई. अगर इसके तकनीकी पहलू को समझने की कोशिश की जाए तो कई लोगों के मन में यह सवाल आ सकता है कि पुलिस सोशल मीडिया पोस्ट को ट्रैक कैसे करती है. आज हम यही जानेंगे कि पुलिस आखिर सोशल मीडिया पोस्ट को ट्रैक कैसे करती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कैसे ट्रैक होती है सोशल मीडिया पोस्ट?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">अब अलग-अलग राज्यों की पुलिस के पास स्पेशल सेल्स हैं, जो सोशल मीडिया पर नजर रखती है. इसके अलावा किसी बड़ी घटना के समय पुलिस सोशल मीडिया पर निगरानी और बढ़ा देती है. इसके अलावा अब पुलिस के पास एआई पावर्ड सर्विलांस टूल्स, आईपी ट्रैकिंग और मेटाडेटा एनालिसिस समेत कई तरीके हैं, जिससे भड़काऊ सोशल मीडिया पोस्ट करने वाले यूजर्स की पहचान की जा सकती है. इस पूरी प्रोसेस के कई स्टेप्स हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>मॉनिटरिंग से होती है शुरुआत</strong></p>
<p style="text-align: justify;">किसी भी बड़ी घटना के समय पुलिस लगातार पब्लिक पोस्ट्स, हैशटैग और ग्रुप्स आदि को स्कैन करती रहती है. जांच के दौरान अगर पुलिस को जरूरत महसूस होती है तो वो सोशल मीडिया कंपनियों से कानूनी प्रक्रिया के तहत यूजर्स की जानकारी हासिल कर सकती है. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>मेटाडेटा एनालिसिस-</strong> जब भी इंटरनेट पर कोई फोटो या कंटेट पोस्ट होता है तो इसके साथ मेटाडेटा भी अपलोड होता है, जिसमें टाइमस्टैंप, डिवाइस इंफोर्मेशन और जियोलोकेशन टैग्स आदि होते हैं. इस मेटाडेटा को एनालाइज कर भी पोस्ट करने वाले की लोकेशन का पता लगाया जा सकता है. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>IP एड्रेस ट्रैकिंग-</strong> मेटाडेटा के अलावा पुलिस सोशल मीडिया पोस्ट का IP एड्रेस भी ट्रैक कर सकती है. आसान भाषा में समझें तो IP एड्रेस को इंटरनेट की दुनिया में डिजिटल एड्रेस के तौर पर समझा जा सकता है. इससे डिवाइस की पहचान आसान हो जाती है. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>जियोफेंसिंग डेटा-</strong> आजकल कई ऐसे टूल्स मौजूद हैं, जिनकी मदद से ऐप्स से लोकेशन डेटा लिया जा सकता है. इससे पुलिस यह पता लगा सकती है कि किसी टाइम पर किस लोकेशन पर कितने डिवाइस एक्टिव थे. इसके अलावा कई डिजिटल फॉरेंसिक टूल्स भी अवेलेबल हैं, जो किसी संदिग्ध के डिवाइस से सारा डेटा निकाल सकते हैं. इन टूल्स की मदद से डिलीट किए गए मैसेज और पोस्ट आदि को भी रिकवर किया जा सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें-</strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong><a title="खाने से लेकर टिकट तक सब स्कैन कर लेगा आईफोन, ऐप्पल कर रही है यह तगड़ी तैयारी" href=" target="_self">खाने से लेकर टिकट तक सब स्कैन कर लेगा आईफोन, ऐप्पल कर रही है यह तगड़ी तैयारी</a></strong></p>
कैसे ट्रैक होती है सोशल मीडिया पोस्ट, पुलिस कैसे लगाती है अपराधी का पता?
Related articles
