<p style="text-align: justify;"><strong>Thoughts Will Control Video Games:</strong> अब वह दिन दूर नहीं, जब इंसान अपने विचारों से ही वीडियो गेम्स खेल सकेगा. गेम को कंट्रोल करने के लिए कंट्रोलर की जरूरत नहीं होगी और इंसान अपनी सोच से ही स्क्रीन पर चल रहे गेम को कंट्रोल कर पाएगा. इसके लिए रिसर्चर ने ब्रेन-कंट्रोल्ड गेमिंग सिस्टम तैयार किया है, जो दिमाग की नैचुरल वायरिंग से काम करने का तरीका सीखता है. इससे मेंटल हेल्थ, मेडिसिन और ह्यूमन-कंप्यूटर इंटरेक्शन का तरीका पूरी तरह बदल सकता है. आइए एक नजर डालते हैं कि यह सिस्टम कैसे काम करेगा.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>दिमाग में चल रहे विचारों से कंट्रोल हो जाएगा गेम</strong></p>
<p style="text-align: justify;">येल यूनिवर्सिटी के रिसर्चर ने एक नया ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) बनाया है, जिसकी मदद से लोग अपनी ब्रेन एक्टिविटी के सहारे वीडियो गेम खेल सकते हैं. रियल-टाइम फंक्शनल MRI (fMRI) का यूज करते हुए रिसर्चर की टीम ने एक डेमो दिखाया, जिसमें यूजर अपने विचारों से कंप्यूटर को कंट्रोल कर सकता है. रिसर्चर का कहना है कि ब्रेन एक्टिविटी इस्टैबलिश्ड न्यूरल पाथवेज को फॉलो करती है. जब इन पाथवेज के हिसाब से सिस्टम को डिजाइन किया जाता है तो BCI को यूज करना सीखना आसान बन जाता है. जब एक बार BCI ब्रेन की न्यूरल स्ट्रक्चर के हिसाब से अलाइन हो जाता है तो यूजर को जल्दी इसका कंट्रोल मिल जाता है. टेस्ट में पता चला कि कुछ पार्टिसिपेंट्स ने एक घंटे से भी कम में BCI का कंट्रोल ले लिया था और कई मामलों में यह और भी जल्दी हो गया. वहीं अगर यह न्यूरल स्ट्रक्चर के हिसाब से अलाइन नहीं होता तो यूजर के लिए कंट्रोल सीखना मुश्किल हो जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कहां काम आ सकता है नया सिस्टम?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">रिसर्च टीम में शामिल Erica Busch ने कहा कि इस सिस्टम को बातचीत और चलने-फिरने में परेशानियों का सामना कर रहे लोगों से लेकर डिप्रेशन और एंग्जायटी का इलाज ढूंढने तक में यूज किया जा सकता है. यह कंज्यूमर गेम्स और नई जनरेशन की टेक्नोलॉजी को डेवलप करने के भी काम आ सकता है. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>मेंटल हेल्थ के फील्ड में ला सकता है क्रांतिकारी बदलाव</strong></p>
<p style="text-align: justify;">इस सिस्टम को डिप्रेशन और एंग्जायटी आदि का इलाज ढूंढने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. आगे चलकर इस सिस्टम को हेल्दी लोगों पर यूज कर बेहतर तरीके से ट्रेनिंग दी जा सकती है, जो इसकी ओवरऑल परफॉर्मेंस को इम्प्रूव करने में मदद करेगा. बता दें कि एलन मस्क की कंपनी <a title="न्यूरालिंक" href=" target="_self">न्यूरालिंक</a> भी इसी तरह का BCI चिप तैयार कर रही है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें-</strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong><a title="हिंदी बोलने वालों को एआई का यूज पड़ रहा ज्यादा महंगा, सामने आई चौंकाने वाली जानकारी" href=" target="_self">हिंदी बोलने वालों को एआई का यूज पड़ रहा ज्यादा महंगा, सामने आई चौंकाने वाली जानकारी</a></strong></p>
सिर्फ सोच से चलेगा वीडियो गेम, नया कमाल करने की तैयारी में हैं साइंटिस्ट
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