<p style="text-align: justify;"><strong>Smartphone Price Hike:</strong> स्टोरेज और <a title="मेमोरी चिप्स की कमी" href=" target="_self">मेमोरी चिप्स की कमी</a> के कारण सस्ते से लेकर महंगे तक, हर सेगमेंट के <a title="फोन की कीमतें बढ़ रही हैं" href=" target="_self">फोन की कीमतें बढ़ रही हैं</a>. सस्ते फोन लगातार महंगे होते जा रहे हैं और नए सस्ते फोन लॉन्च करने में कंपनियों के पसीने छूट रहे हैं. इस कारण यह डर जताया जा रहा है कि मार्केट से सस्ते फोन गायब हो सकते हैं. कुछ समय पहले तक जो फोन सस्ते माने जा रहे थे, उनकी कीमत हजारों रुपये बढ़ गई है और उन्हें खरीदना भी अब महंगा हो गया है. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सस्ते फोन की शिपमेंट में होगी गिरावट</strong></p>
<p style="text-align: justify;">Omdia की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 400 डॉलर (लगभग 38,000) रुपये से कम कीमत वाले फोन की शिपमेंट में इस साल 22 प्रतिशत से ज्यादा की कमी आने की संभावना है. इसके पीछे स्टोरेज और मेमोरी चिप्स की कमी सबसे बड़ा कारण है. अब एआई फीचर्स के कारण फोन में ज्यादा मेमोरी की जरूरत पड़ने लगी है, लेकिन इन चिप्स की कमी के चलते कंपनियों के लिए ऐसे फोन बनाने मुश्किल हो गए हैं. उनके मार्जिन पहले ही कम हो गए हैं और अब वो बिना कीमत बढ़ाए फोन में सारे फीचर्स नहीं दे सकते.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अब काम नहीं आ रहीं दाम कम रखने की कोशिशें</strong></p>
<p style="text-align: justify;">रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनियां लगातार कीमतें कम रखने की कोशिशों में लगी हुई हैं. इसके लिए सस्ते डिस्प्ले पैनल, कैमरा सेंसर और रेडियो कंपोनेट इस्तेमाल किए जा रहे है, लेकिन अब इसमें और कटौती की गुंजाइश नहीं बची है. यही कारण है कि ओप्पो, शाओमी और वीवो जैसी कंपनियों को अपने <a title="फोन महंगे करने पड़ रहे हैं" href=" target="_self">फोन महंगे करने पड़ रहे हैं</a> या कीमत बढ़ने से रोकने के लिए फीचर्स में कमी करनी पड़ रही है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्यों हो गई मेमोरी चिप्स की कमी?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एआई बूम के बाद डेटा सेंटर के लिए स्टोरेज और मेमोरी चिप की डिमांड बढ़ गई है. इसे पूरा करने के लिए चिप निर्माता कंपनियों ने कंज्यूमर मार्केट यानी लैपटॉप और स्मार्टफोन आदि में यूज होने वाली चिप्स का प्रोडक्शन कम कर दिया. अब उनका पूरा फोकस एआई डेटा सेंटर के लिए चिप बनाने पर है. इस कारण स्मार्टफोन आदि डिवाइसेस के लिए चिप की कमी हो गई. इनकी कीमतें बढ़ने से कंपनियों की लागत बढ़ने लगीं. Omdia की रिपोर्ट बताती है कि इस साल की पहली तिमाही में 38,000 रुपये से कम कीमत वाले फोन में कंपनियों का 60 प्रतिशत खर्चा केवल मेमोरी चिप्स खरीदने में हो रहा था. इससे पता चलता है कि कंपनियों के लिए सस्ते फोन बनाना कितना मुश्किल हो गया है.</p>
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क्या मार्केट में सस्ते फोन मिलने ही बंद हो जाएंगे? नई रिपोर्ट ने बढ़ा दी चिंता
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